एसआईआर पर फिर भड़कीं ममता बनर्जी, मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा पत्र

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक बार फिर पत्र भेजा है। अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं, प्रक्रिया संबंधी चूकों और प्रशासनिक कमियों पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई है। ममता बनर्जी का कहना है कि जिस तरीके से एसआईआर को लागू किया जा रहा है, उससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की मूल भावना को ठेस पहुंच रही है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर के दौरान गंभीर स्तर की प्रक्रियात्मक गड़बड़ियां सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों का पालन नहीं किया जा रहा और प्रशासनिक स्तर पर समुचित निगरानी का अभाव है। ममता बनर्जी के अनुसार, ऐसी स्थिति में मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से मांग की है कि इन खामियों को तत्काल दूर किया जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि मौजूदा स्वरूप में यह प्रक्रिया जारी रही, तो बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक शासन की बुनियादी अवधारणा पर सीधा प्रहार बताया। ममता बनर्जी ने एसआईआर को “मनमाना और अव्यवस्थित” करार देते हुए इसे रोकने या पूरी तरह सुधारने की अपील की है।West Bengal CM Mamata Banerjee writes to CEC Gyanesh Kumar
— ANI (@ANI) January 4, 2026
"I am once again constrained to write to you in order to place on record) my grave concern regarding the serious irregularities, procedural violations, and administrative lapses being witnessed during the ongoing Special… pic.twitter.com/GvGEwGrw4v
पत्र में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एसआईआर के नाम पर यदि कोई गैरकानूनी गतिविधि हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग को लेनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में अपनाई गई एसआईआर की प्रक्रिया, बिहार सहित अन्य राज्यों में लागू मॉडल से पूरी तरह भिन्न है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
ममता बनर्जी ने नवंबर से राज्य में चल रहे एसआईआर को “अव्यवस्थित, अराजक और जोखिम भरा” बताते हुए कहा कि हालात अब गंभीर स्तर तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने जलपाईगुड़ी में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समेत कई बूथ लेवल अधिकारियों की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं के बाद स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। मुख्यमंत्री का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार अपनी आशंकाएं चुनाव आयोग के सामने रखी थीं, लेकिन हालात में सुधार न होने के कारण उन्हें दोबारा पत्र लिखना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बिना पर्याप्त तैयारी, स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रभावी संवाद के अधिकारियों और आम लोगों पर एसआईआर थोप दिया। उनके अनुसार, उचित योजना के अभाव में इस प्रक्रिया ने प्रशासनिक अव्यवस्था को जन्म दिया है, जिसका सीधा असर लोकतांत्रिक अधिकारों पर पड़ सकता है।
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