महिला की प्रोफेशनल पहचान पर वैवाहिक रोक नहीं लगाई जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी योग्य महिला का अपने पेशेवर करियर को आगे बढ़ाना और अपने बच्चे के लिए सुरक्षित व स्थिर माहौल सुनिश्चित करना क्रूरता या परित्याग नहीं माना जा सकता।
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी एक अलग रह रहे पति-पत्नी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने निचली अदालतों के निष्कर्षों को खारिज करते हुए कहा कि किसी महिला की पेशेवर पहचान को वैवाहिक संबंधों में “वीटो” के अधीन नहीं रखा जा सकता।
मामले में यह सामने आया कि महिला एक दंत चिकित्सक है और वह अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए अहमदाबाद में अपना क्लिनिक स्थापित करना चाहती थी। हालांकि, पति और ससुराल पक्ष की अपेक्षा थी कि वह पति की सैन्य तैनाती के कारण उसके साथ अलग स्थान पर रहे। इसी विवाद को लेकर वैवाहिक संबंधों में तनाव बढ़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालतों द्वारा महिला के करियर विकल्प को क्रूरता या परित्याग के रूप में देखना एक पुरानी और सामंती सोच को दर्शाता है। अदालत ने टिप्पणी की कि 21वीं सदी में भी ऐसी मानसिकता स्वीकार्य नहीं है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला का अपने पेशेवर जीवन को आगे बढ़ाना और बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए अलग रहना वैवाहिक दायित्वों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
अदालत ने माना कि दोनों पक्षों के बीच सुलह की कोई संभावना नहीं बची है, इसलिए तलाक की डिक्री को विवाह के “अपरिवर्तनीय रूप से टूटने” के आधार पर बरकरार रखा गया, न कि क्रूरता या परित्याग के आधार पर।
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