विशाखापत्तनम में शुरू हुआ ‘मिलन 2026’, राजनाथ सिंह ने वैश्विक समुद्री सहयोग पर दिया जोर

विशाखापत्तनम। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसी समुद्री व्यवस्था स्थापित करना चाहता है जो अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता पर आधारित हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साझा प्रयास करना होगा।
समुद्री सुरक्षा के समक्ष नई चुनौतियां
रक्षा मंत्री ने कहा कि पारंपरिक खतरे अभी भी मौजूद हैं, लेकिन अब समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद, अवैध मछली पकड़ना, तस्करी, साइबर जोखिम और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान जैसी नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं ने मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों की मांग को और बढ़ा दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी देश इन चुनौतियों का सामना अकेले नहीं कर सकता। सहयोग अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन गया है। अंतरराष्ट्रीय जल संबंधी मामलों के समाधान के लिए ‘यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी’ एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करता है। रक्षा मंत्री ने वैश्विक नौसैनिक संरचना की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसमें सूचना साझाकरण, समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा और आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
भारत की समुद्री नीति: ‘सागर’ से ‘महासागर’ तक
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत की समुद्री नीति अब ‘सागर’ दृष्टि से आगे बढ़कर ‘महासागर’ दृष्टि तक विकसित हो चुकी है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 74 देशों की भागीदारी के साथ आयोजित मिलन 2026 अब तक का सबसे बड़ा और समावेशी संस्करण है, जो भारत पर वैश्विक समुद्री समुदाय के भरोसे को प्रदर्शित करता है।
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