मिशन कर्मयोगी: यूपी सरकार का लक्ष्य, एआई में नंबर-वन राज्य बनाना

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने मिशन कर्मयोगी के माध्यम से प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में दक्ष कर्मचारियों के मामले में देश में नंबर-वन बनाने का लक्ष्य तय किया है।
इस दिशा में प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव एसपी गोयल ने शुक्रवार को आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की और निर्देश दिए कि आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर निष्क्रिय उपयोगकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए सभी विभाग व्यापक अभियान चलाएँ।
चार घंटे का न्यूनतम ऑनलाइन प्रशिक्षण
मिशन कर्मयोगी का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को तकनीकी, व्यावहारिक और कार्यात्मक रूप से दक्ष बनाना है। इसके तहत उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक एआई दक्ष और ‘कर्मयोगी उत्कर्ष बैज’ धारकों वाला राज्य बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने विभागीय और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों के नामित होने के निर्देश दिए, जो अभियान की निगरानी और समन्वय सुनिश्चित करेंगे। प्रत्येक कर्मचारी के लिए न्यूनतम चार घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण अनिवार्य होगा, जिसमें कम से कम एक घंटे का प्रशिक्षण एआई संबंधित पाठ्यक्रम पर आधारित होगा।
मुख्य सचिव ने बताया कि दो से आठ अप्रैल तक ‘साधना सप्ताह’ आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सभी कर्मचारियों को आईजीओटी पोर्टल पर निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करना होगा। इसके साथ ही वेबिनार, समूह चर्चा और पैनल चर्चा आयोजित कर उनकी रिकॉर्डिंग पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रदेश में पंजीकरण और उपलब्धियाँ
बैठक में यह जानकारी दी गई कि प्रदेश के करीब 20 लाख कर्मचारियों में से 19,99,497 कर्मी आईजीओटी प्लेटफार्म पर पंजीकृत हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों ने अब तक एक करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरा कर देश में प्रथम स्थान हासिल किया है।
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने भरोसा जताया कि इस पहल से कर्मचारियों की डिजिटल क्षमता और एआई ज्ञान में वृद्धि होगी, जिससे सुशासन को बढ़ावा मिलेगा और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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