महिला आरक्षण और परिसीमन पर सियासी विवाद, खरगे ने सरकार पर साधा निशाना

देश में महिला आरक्षण कानून और परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा है कि यह पूरा कदम राजनीतिक लाभ लेने की मंशा से उठाया जा रहा है, जिसके दूरगामी प्रभाव लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ सकते हैं।
📌 विशेष सत्र और जल्दबाजी पर सवाल
खरगे ने कहा कि सरकार 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल को जल्दबाजी में पारित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने इसे मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट की भावना के खिलाफ बताया और कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक चर्चा आवश्यक है।
⚖️ “चुनावी फायदा लेने की कोशिश” का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने के नाम पर चुनावी लाभ लेने की रणनीति पर काम कर रही है। उनके अनुसार, आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर इस मुद्दे को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
🗳️ परिसीमन और सीटों में बदलाव पर चिंता
खरगे ने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने और राज्यों की विधानसभाओं में भी विस्तार की चर्चा देश के चुनावी ढांचे को बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने इसे एक ऐसा बदलाव बताया, जिसके लंबे समय तक राजनीतिक और संवैधानिक असर देखने को मिल सकते हैं।
🤝 विपक्ष को भरोसे में न लेने का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस पूरे मामले पर विपक्षी दलों से कोई व्यापक चर्चा नहीं की। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया।
🏛️ लोकतंत्र पर असर को लेकर चिंता
खरगे ने कहा कि ऐसे बड़े फैसले लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस विषय पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
🔚 विपक्ष की रणनीति की तैयारी
उन्होंने बताया कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर रणनीति बनाएगा और संसद में मजबूती से अपनी बात रखेगा। उनके अनुसार यह सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण विषय है।
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