IAS रिंकू सिंह राही के इस्तीफे पर सियासत तेज, कांग्रेस ने राष्ट्रपति से की हस्तक्षेप की मांग

नई दिल्ली: आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही का इस्तीफा अब सियासी रूप लेता दिख रहा है। कांग्रेस ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से अपील की है कि अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार न किया जाए। पार्टी ने यह भी मांग की कि उत्तर प्रदेश सरकार राही को जिम्मेदारी दें, जो लंबे समय से काम नहीं मिलने के कारण अपनी मूल प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) में लौटना चाहते हैं।
कांग्रेस का आरोप: दलित अधिकारियों के साथ भेदभाव
कांग्रेस के एससी विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि आज भी, जब कोई दलित युवा कठिन मेहनत करके IAS या PCS अधिकारी बनता है, तो उसे उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
गौतम ने कहा, "ऐसे हालात बन जाते हैं कि ईमानदार अधिकारियों को अपनी नौकरी से इस्तीफा देना पड़ता है। रिंकू सिंह राही ऐसे ही एक अधिकारी हैं। जब वे PCS अधिकारी थे, उन्होंने एक बड़े घोटाले का खुलासा किया था, जिसमें करोड़ों रुपए का गबन हुआ था। उस दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ और उन्हें गोली भी लगी।"
ईमानदारी की सजा: लगातार तबादले और जिम्मेदारी से वंचित
गौतम ने बताया कि राही के IAS बनने के बाद भी उन्हें लगातार तबादले और तंग किया गया। पिछले आठ महीनों से उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई। ऐसी स्थिति में राही ने अपना वेतन लेने से इनकार कर तकनीकी इस्तीफा सौंप दिया।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया, "क्या देश में ऐसे ईमानदार अधिकारियों की कोई जरूरत नहीं है? क्या किसी अधिकारी को सिर्फ दलित होने की वजह से सजा दी जाएगी?"
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
राजेंद्र पाल गौतम ने राष्ट्रपति से अपील की कि IAS रिंकू सिंह राही का तकनीकी इस्तीफा स्वीकार न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यूपी सरकार को निर्देश दिया जाए कि उन्हें काम सौंपा जाए।
रिंकू सिंह राही, जो वर्तमान में लखनऊ में राजस्व बोर्ड से जुड़े हैं, ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर PCS में वापस भेजने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि पिछले आठ महीनों से उन्हें कोई निश्चित जिम्मेदारी नहीं मिली है।
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