तमिलनाडु में राहुल-स्टालिन साथ नहीं?: डीएमके ने ठुकराई कांग्रेस की मांग

तमिलनाडु में सत्ता साझेदारी की अटकलों पर विराम लगाते हुए, डीएमके के वरिष्ठ नेता और राज्य मंत्री आई. पेरियासामी ने रविवार को कहा कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन किसी भी गठबंधन सरकार के पक्ष में नहीं हैं। पेरियासामी ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि डीएमके हमेशा से पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने की नीति पर रही है और किसी तरह की साझेदारी का विचार नहीं है।
डीएमके का रुख
पेरियासामी ने कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस की यह मांग कि सत्ता में हिस्सेदारी दी जाए, उनके अधिकार में आती है। लेकिन डीएमके ने हमेशा इस तरह की मांग का समर्थन नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में नेतृत्व की भूमिका हमेशा डीएमके की रही है और मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख में कोई बदलाव नहीं है।
कांग्रेस की मांग
तमिलनाडु कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह दोहराया है कि अगर डीएमके नेतृत्व वाला गठबंधन जीतता है, तो उन्हें सत्ता में हिस्सा मिलना चाहिए। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने हाल ही में कहा था कि अब इस विषय पर चर्चा करने का समय आ गया है। इसके अलावा, किलीयूर के विधायक एस. राजेश कुमार और कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडंकर ने भी सत्ता साझेदारी की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।
इतिहास और गठबंधन की परंपरा
राज्य में 1967 के बाद से डीएमके और एआईएडीएमके ने हमेशा पूर्ण बहुमत वाली सरकार ही बनाई है, चाहे चुनाव में अन्य दलों के साथ गठबंधन हुआ हो। 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूर्ण बहुमत नहीं ला सकी थी, तब गैर-कांग्रेसी नेताओं को सरकार में जगह मिली थी। 2006-2011 के बीच डीएमके ने सहयोगी दलों के समर्थन से पूरी पांच साल की सरकार चलाई थी, लेकिन सत्ता साझा नहीं की थी। उस समय भी कांग्रेस ने हिस्सेदारी की मांग की थी, जो स्वीकार नहीं की गई।
निष्कर्ष
डीएमके का रुख स्पष्ट है—भले ही अन्य दल गठबंधन में शामिल हों, सत्ता साझा नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस बात पर जोर दिया है कि राज्य में नेतृत्व हमेशा डीएमके के हाथ में रहेगा और कोई गठबंधन सरकार नहीं बनेगी।
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