‘लुंगी वाला’ टिप्पणी पर राज्यसभा में हंगामा, सभापति ने सदस्यों को दी नसीहत

HIGHLIGHTS
- संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने दोनों पक्षों को सुनने की अपील की
- सभापति सीपी राधाकृष्णन ने असम्मानजनक टिप्पणियों पर चिंता जताई
- सदस्यों को साथी सांसदों की भावनाओं का ध्यान रखने की सलाह
नई दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को सीपीआईएम सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि एक सदस्य ने उन्हें ‘लुंगी वाला’ कहकर संबोधित किया। ब्रिटास ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए इसे सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक दल का नहीं, बल्कि सभी दलों से संबंधित है।
क्या बोले जॉन ब्रिटास
जॉन ब्रिटास ने कहा कि वह एक भारतीय, दक्षिण भारतीय और गर्वित मलयाली हैं। इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें टोकते हुए कहा कि कोई दक्षिण भारतीय या उत्तर भारतीय नहीं होता, सभी सिर्फ भारतीय हैं।
ब्रिटास ने अपनी भाषा, संस्कृति, खान-पान और पहनावे पर गर्व जताया और कहा कि भारतीय संविधान देश की विविधता का सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि अगर उनसे पूछा जाए कि सदन से विदा होने के समय उनकी सबसे बड़ी सीख क्या होगी, तो वह निश्चित रूप से विविधता होगी। उनके मुताबिक, यही विविधता देश की एकता को अनोखे तरीके से बनाए रखती है।
उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले एक ऐसी सदस्य, जिनका वह बहुत सम्मान करते हैं, उस समय उन्हें परेशान कर रही थीं, जब वह वैधानिक प्रस्ताव के प्रस्तावक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। ब्रिटास ने आरोप लगाया कि बहस और मौखिक तकरार हो सकती है, लेकिन संबंधित सदस्य ने उन्हें बार-बार ‘लुंगी वाला’ कहकर संबोधित किया।
संसदीय कार्यमंत्री ने सभापति से की अपील
मामले पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभापति से संबंधित सदस्य को बुलाकर दोनों पक्षों की बात सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभापति संबंधित सदस्य को बुलाकर उनका पक्ष भी सुन सकते हैं और इसके बाद जो उचित लगे, उस पर फैसला ले सकते हैं।
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों को एक-दूसरे की भावनाओं और संवेदनाओं का सम्मान करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सदन में सदस्यों के भाषण के दौरान असम्मानजनक और अशोभनीय टिप्पणियों के कई मामले उनके संज्ञान में आए हैं।
सभापति ने दी सदस्यों को नसीहत
सभापति ने कहा कि सदस्यों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनकी किसी टिप्पणी से साथी सदस्यों की भावनाओं और संवेदनाओं को ठेस न पहुंचे। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति अनूठी है और यह अलग-अलग क्षेत्रीय संस्कृतियों से मिलकर बनी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में किसी सदस्य की सांस्कृतिक परंपराओं या क्षेत्रीय पहचान का अनादर नहीं होना चाहिए। सभापति ने कहा कि किसी सदस्य के भाषण के दौरान बीच में हस्तक्षेप करते हुए असम्मानजनक और अशोभनीय टिप्पणियां किए जाने के कुछ मामले उनके संज्ञान में आए हैं।
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वह इस मामले को जल्द सुलझाएंगे। उन्होंने बताया कि संबंधित सदस्यों को जल्द ही अपने कक्ष में बुलाकर मामले का समाधान किया जाएगा।
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