देश खाप के नए चौधरी संजीव तोमर ने राकेश टिकैत से की मुलाकात, नशाखोरी और भ्रूण हत्या पर हुई चर्चा

HIGHLIGHTS
- देश खाप के नवनियुक्त चौधरी संजीव तोमर ने राकेश टिकैत से मुलाकात की।
- शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे राकेश टिकैत के आवास पर हुई मुलाकात।
- नशाखोरी, घटती जनसंख्या, दहेज प्रथा और कन्या भ्रूण हत्या पर चर्चा हुई।
मुजफ्फरनगर। देश खाप (तोमर) के नवनियुक्त चौधरी संजीव तोमर ने शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच समाज से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई। इनमें नशाखोरी, घटती जनसंख्या, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और अन्य सामाजिक समस्याएं शामिल रहीं।
संजीव तोमर ने कहा कि समाज में बढ़ता नशा और घटती जनसंख्या भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यदि समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका समाज पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समाज को बचाने के लिए इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करना जरूरी है।
गौरतलब है कि देश खाप के पूर्व चौधरी सुरेंद्र सिंह का कुछ दिन पहले बीमारी के चलते निधन हो गया था। उनके निधन के बाद सामाजिक परंपरा के अनुसार उनके बड़े बेटे संजीव तोमर को पगड़ी पहनाकर देश खाप का नया चौधरी नियुक्त किया गया। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद संजीव तोमर पहली बार मुजफ्फरनगर पहुंचे।
खापों में नए चौधरी की नियुक्ति पर हुआ स्वागत
संजीव तोमर, किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत की बहन के बेटे भी हैं। मुलाकात के दौरान राकेश टिकैत ने प्रतिनिधिमंडल का शॉल भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि खापों में नए चौधरी की नियुक्ति के बाद उनका स्वागत करना सामाजिक परंपरा का हिस्सा है।
राकेश टिकैत ने कहा कि सभी खाप चौधरियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नशा मुक्ति, कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम और पौधरोपण जैसे सामाजिक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि खापों को समाज में सुधार लाने की जिम्मेदारी निभानी होगी, जिससे ये परंपराएं आगे भी कायम रह सकें।
वहीं, संजीव तोमर ने कहा कि बड़ी खाप की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी सामाजिक जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। उन्होंने नशा मुक्ति अभियान पर जोर देते हुए कहा कि अगर उनके प्रयासों से एक बच्चा भी नशे की लत से बच जाता है तो वह इसे अपनी बड़ी सफलता मानेंगे।
लड़कियों और लड़कों के अनुपात पर जताई चिंता
संजीव तोमर ने घटती जनसंख्या और कन्या भ्रूण हत्या के मुद्दे पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से 2010 के बीच कन्या भ्रूण हत्या के मामले अधिक सामने आए थे। इसका प्रभाव अब लड़कियों और लड़कों के अनुपात के साथ-साथ विवाह संबंधों पर भी देखने को मिल रहा है।
उन्होंने दहेज प्रथा, देर से होने वाली शादियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों जैसे विषयों पर भी समाज के बीच बातचीत और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई। संजीव तोमर ने कहा कि समाज में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए खाप चौधरियों को आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
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