सरमा ने बताया कांग्रेस के 58 विधायकों के समर्थन के बावजूद क्यों नहीं बने थे मुख्यमंत्री

असम: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि साल 2014 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनाने के लिए शपथ की तारीख तय करने के लिए कहा था। सीएम सरमा के अनुसार, उस समय उनके पास पार्टी के 58 विधायकों का समर्थन था और वे मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में थे।
2011 के बाद असम कांग्रेस में खींचतान
साल 2011 के विधानसभा चुनाव के बाद असम कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद बढ़ने लगे थे। कई विधायक चाहते थे कि तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की जगह हिमंत सरमा को नेतृत्व सौंपा जाए। हिमंत सरमा बताते हैं कि सोनिया गांधी ने उन्हें शपथ लेने की तारीख खुद तय करने के लिए कहा था और उन्होंने कामाख्या मंदिर के अंबुबाची मेले के बाद, जून 2014 में शपथ लेने की योजना बनाई थी।
अचानक बदलाव
हालांकि, उस समय राहुल गांधी अमेरिका में थे और वहां से उन्होंने कांग्रेस नेताओं को फोन किए। इसके बाद राजनीतिक माहौल बदल गया और हिमंत सरमा को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।
कांग्रेस से भाजपा तक
इस अनुभव से निराश होकर हिमंत बिस्व सरमा ने 2015 में कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने असम में भाजपा को पहली बार सत्ता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद, साल 2021 में वे असम के मुख्यमंत्री बने।
अब संतोष और भविष्य की योजना
सीएम सरमा ने कहा कि उस समय उन्हें निराशा हुई थी, लेकिन अब वे मानते हैं कि जो हुआ, वही सही था। उनके मुताबिक, भाजपा में आने के बाद उन्हें असम और सनातन धर्म की सेवा करने का अवसर मिला। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि वे कभी किताब लिखेंगे, तो इस पूरे घटनाक्रम का विस्तार से खुलासा किया जाएगा।
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