सौरभ हत्याकांड: साहिल और मुस्कान ने हाईकोर्ट में दी फांसी की सजा को चुनौती

HIGHLIGHTS
- निचली अदालत का 165 पन्नों का आदेश मंजूरी के लिए हाईकोर्ट भेजा गया है।
- साहिल और मुस्कान की अपील पर सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
- अमित हत्याकांड में दोषी रविता और अमरदीप भी अपील की तैयारी कर रहे हैं।
मेरठ। नीले ड्रम में शव मिलने के मामले में चर्चित सौरभ हत्याकांड के दोषी साहिल और मुस्कान ने निचली अदालत के मृत्युदंड के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दोनों ने सजा के खिलाफ अपील दायर की है।
हालांकि, निचली अदालत से मिली फांसी की सजा को अभी हाईकोर्ट की मंजूरी नहीं मिली है। दूसरी ओर, अमित हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाने वाले अमरदीप और रविता भी हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं। जेल प्रशासन को भी इस संबंध में जानकारी मिल चुकी है।
ब्रह्मपुरी में 3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या कर उसके शव को नीले ड्रम में सीमेंट से भरकर छिपा दिया गया था। इस वारदात को सौरभ की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने अंजाम दिया था। जिला जज की अदालत ने 14 अक्टूबर को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया था।
कोर्ट ने मुस्कान और साहिल को सुनाई थी फांसी की सजा
दोनों दोषी फिलहाल जेल में बंद हैं। जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई थी। फैसले से संबंधित 165 पन्नों का आदेश मंजूरी के लिए हाईकोर्ट भेजा गया है। हालांकि, अब तक वहां से इसकी स्वीकृति नहीं मिली है।
गुरुवार को वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला के माध्यम से मुस्कान और साहिल ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। सुशील शुक्ला ने बताया कि दोनों ने उन्हें अपना अधिवक्ता नियुक्त करने की स्वीकृति दी थी। इसके बाद निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए अपील की गई। फिलहाल सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है।
वहीं, अमित हत्याकांड में अपर जिला जज जयवीर नागर की अदालत ने पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इन दोनों दोषियों की ओर से भी हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी की जा रही है।
12 अप्रैल 2025 की रात अमित की गला दबाकर हत्या की गई थी। वारदात को हादसा दिखाने के लिए शव पर सांप छोड़ दिया गया था।
बेटी के बालिग होने तक मुस्कान को फांसी न देने की अपील
कवयित्री अनामिका जैन अंबर और उनके पति, कवि सौरभ जैन, गुरुवार को जेल में मुस्कान से मिलने पहुंचे। अनामिका ने कहा कि साहिल और मुस्कान का अपराध माफी के योग्य नहीं है। हालांकि, उन्होंने मुस्कान की 10 महीने की बच्ची का जिक्र करते हुए कहा, “मैं एक मां हूं। मुस्कान की 10 माह की बच्ची को देखकर मन करता है कि आजीवन उसका पूरा खर्च उठाऊं। बच्ची का क्या अपराध है?”
अनामिका के मुताबिक, बच्ची के बालिग होने तक मुस्कान को फांसी नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उसकी सजा को उम्रकैद में बदला जा सकता है। अनामिका ने बताया कि जेल में मुस्कान की आंखों में पश्चाताप का डर साफ दिखाई दे रहा था।
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