वरिष्ठ पर्यावरणविद् माधव गाडगिल का निधन, जयराम रमेश ने जताया गहरा शोक

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद् माधव गाडगिल के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। रमेश ने गाडगिल को राष्ट्र निर्माता बताते हुए कहा कि उनके काम ने सार्वजनिक नीति और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में स्थायी प्रभाव छोड़ा।
83 वर्ष के गाडगिल का बुधवार देर रात पुणे के एक अस्पताल में संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके परिवार ने गुरुवार को इस खबर की पुष्टि की।
रमेश ने याद किया कि पिछले पांच दशकों में गाडगिल ने अनेक लोगों के लिए मित्र, मेंटर और मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि गाडगिल एक उत्कृष्ट अकादमिक, समर्पित फील्ड रिसर्चर, संस्थान निर्माता और जन आंदोलनों के प्रति जागरूक विचारक थे।
गाडगिल को विशेष रूप से पश्चिमी घाट में उनके शोध के लिए जाना जाता था। रमेश ने बताया कि उन्होंने 1970-80 के दशक में सेव साइलेंट वैली आंदोलन और बस्तर के जंगलों की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रयासों ने नीति-निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई।
पूर्व मंत्री ने यह भी बताया कि गाडगिल ने बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को नई दिशा दी। 2009-2011 के दौरान उन्होंने वेस्टर्न घाट्स इकोलॉजी एक्सपर्ट पैनल की अध्यक्षता करते हुए संवेदनशील और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से रिपोर्ट तैयार की, जिसे आज भी उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
रमेश ने यह भी याद किया कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय में ईओ विल्सन के मार्गदर्शन में अध्ययन करने के बाद गाडगिल ने विदेश के अवसरों को छोड़कर भारत लौटकर देश में शोध, शिक्षा, स्थानीय समुदायों के विकास और नीति निर्माण में योगदान दिया।
पूर्व पर्यावरण मंत्री ने कहा कि गाडगिल का जीवन विद्वत्ता और समाज सेवा को समर्पित था। वे विनम्र, सहज और करुणाशील व्यक्तित्व के धनी थे। उनके योगदान को 2024 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा पश्चिमी घाट में उनके मौलिक कार्य के लिए ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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