शिमला में सफाई व्यवस्था ठप, सैहब कर्मचारियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी

शिमला। शहर में सैहब सोसायटी के कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रही, जिसके चलते राजधानी की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थिति यह है कि पिछले तीन दिनों से घरों से कचरा नहीं उठने के कारण कई इलाकों में गंदगी के ढेर जमा हो गए हैं।
सोमवार सुबह सीटीओ चौक पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी वेतन वृद्धि से जुड़ी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाली सैहब सोसायटी के 800 से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। हालांकि नगर निगम की ओर से एजीएम बुलाने और बातचीत के जरिए समाधान का आश्वासन दिया गया है, लेकिन कर्मचारी अभी भी हड़ताल खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं।
इसी बीच नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को आउटसोर्स करने का निर्णय लिया है और इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत ठेकेदारों के माध्यम से घरों से कूड़ा कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाया जाएगा, जबकि आगे का कचरा निपटान नगर निगम अपने स्तर पर करेगा। यदि हड़ताल जारी रहती है तो 20 मई के बाद इस नई व्यवस्था को लागू किया जा सकता है।
सैहब कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन केवल मौखिक आश्वासन दे रहा है, जबकि किसी भी मांग पर लिखित रूप से सहमति नहीं बनी है। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि मांगों के पूरा होने तक आंदोलन जारी रहेगा और मंगलवार को भी धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
नगर निगम प्रशासन ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है। आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि एजीएम बुलाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए काम पर लौटना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि हड़ताल पर रहने वाले कर्मचारियों की सूची रोजाना प्रशासन को भेजी जा रही है।
जिला प्रशासन ने आवश्यक सेवाओं के तहत एस्मा लागू कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद हड़ताल जारी रहने को नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। नगर निगम ने ऐसे कर्मचारियों की सूची जिला प्रशासन को सौंप दी है जो ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं। इसके आधार पर आगे कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है, जिसमें वेतन कटौती और अन्य अनुशासनात्मक कदम शामिल हो सकते हैं।
वहीं, नगर निगम का दावा है कि कई कर्मचारी अब काम पर लौटने के लिए तैयार हैं और उन्होंने प्रशासन से संपर्क भी किया है। हालांकि, कुछ कर्मचारी नेताओं पर अन्य कर्मचारियों पर दबाव बनाने के आरोप भी सामने आए हैं, जिसकी शिकायतें प्रशासन तक पहुंची हैं।
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