SIR पर स्टालिन ने कांग्रेस को घेरा, DMK ने लगाया दोहरे रवैये का आरोप

HIGHLIGHTS
- DMK ने SIR के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों को समर्थन दिया।
- पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और निष्पक्ष जांच की मांग की।
- राहुल गांधी के दावे पर DMK ने कहा कि उसने जुलाई 2025 में ही SIR का विरोध शुरू कर दिया था।
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को समर्थन दिया है। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के साथ कांग्रेस पर भी निशाना साधा।
DMK ने SIR को लेकर कांग्रेस के रुख को दोहरा बताते हुए विपक्षी गठबंधन के भीतर चल रहे मतभेदों को सामने रखा है।
स्टालिन ने स्पष्ट किया DMK का रुख
चेन्नई में DMK संसदीय दल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए एम.के. स्टालिन ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया। बैठक में इस मुद्दे पर चार प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए।
इन प्रस्तावों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके आचरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग शामिल है। इसके अलावा, SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों को पूरा समर्थन देने, CJP नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध करने और उनके आंदोलन के समर्थन के साथ चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए व्यापक सुधारों की मांग की गई।
इन प्रस्तावों के माध्यम से DMK ने कांग्रेस को भी स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की।
राहुल गांधी के दावों पर DMK का सवाल
SIR के मुद्दे को सबसे पहले उठाने के सवाल पर DMK और कांग्रेस के बीच मतभेद सामने आए हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस का कहना है कि उनकी पार्टी ने सबसे पहले इस प्रक्रिया की खामियों को उजागर किया था।
29 सितंबर को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी ने कहा था कि पिछले दो वर्षों में चुनाव आयोग को लेकर जो माहौल बना है, वह कांग्रेस के तथ्यों पर आधारित अभियानों का परिणाम है।
वहीं, DMK ने राहुल गांधी के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसने अन्य विपक्षी दलों से पहले ही SIR का विरोध शुरू कर दिया था। पार्टी के मुताबिक, स्टालिन ने जुलाई 2025 में ही इस प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठाई थी। उस समय बिहार में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की खबरें सामने आई थीं।
स्टालिन ने बिहार में आयोजित मतदाता अधिकार यात्रा में भी हिस्सा लिया था। इस यात्रा में DMK की उपमहासचिव कनिमोझी करुणानिधि भी शामिल हुई थीं। DMK ने सवाल उठाया कि इस मुद्दे पर सवाल उठाने या नेतृत्व का दावा करने का कांग्रेस के पास नैतिक अधिकार क्या है।
राज्यों में कांग्रेस के रुख पर उठाए सवाल
DMK ने अपने प्रस्ताव में आरोप लगाया कि कांग्रेस SIR को लेकर अलग-अलग राज्यों में अलग रुख अपना रही है। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस इस प्रक्रिया का विरोध करती है, लेकिन केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में उसने इस पर उतनी आपत्ति नहीं जताई।
DMK के अनुसार, यदि SIR के दौरान अनियमितताएं हुई हैं, तो उनसे जुड़ी चिंताएं सभी राज्यों और क्षेत्रों में समान रूप से लागू होनी चाहिए।
DMK सांसद ए. राजा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि SIR लागू होने के बाद से DMK ही देश की एकमात्र प्रमुख राजनीतिक पार्टी रही है, जिसने संसद के अंदर और बाहर लगातार इस मुद्दे को उठाया है।
उन्होंने बताया कि स्टालिन ने इस विषय पर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखे थे। इसके बाद कई मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर चर्चा करने और प्रस्ताव पारित करने के लिए चेन्नई पहुंचे थे।
बिहार चुनाव का उदाहरण देकर गठबंधन पर उठाए सवाल
DMK ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान विपक्षी गठबंधन में सामने आई समस्याओं का भी जिक्र किया। स्टालिन ने कहा कि बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर लचीलेपन की कमी देखने को मिली थी।
इसके अलावा, हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा ने गठबंधन से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था।
कई सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और वामपंथी दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए थे। DMK ने इन घटनाओं को गठबंधन के प्रबंधन में हुई चूकों के उदाहरण के तौर पर पेश किया।
चुनाव आयोग की भूमिका पर DMK के आरोप
DMK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि SIR के माध्यम से पात्र नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।
27 अक्टूबर 2025 को जब चुनाव आयोग ने तमिलनाडु समेत 12 राज्यों में SIR कराने की घोषणा की थी, तब स्टालिन ने इस प्रक्रिया को राज्य में लागू नहीं करने की मांग की थी।
उन्होंने त्योहारों और मानसून के मौसम का हवाला देते हुए नवंबर और दिसंबर के दौरान मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम कराने का विरोध किया था।
CJP को समर्थन, TVK और विजय पर भी निशाना
SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बीच DMK सांसद कनिमोझी करुणानिधि चेन्नई में आयोजित एक प्रदर्शन में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के गिरफ्तार नेताओं के प्रति समर्थन जताया।
कनिमोझी ने कहा कि DMK शुरुआत से ही गिरफ्तार नेताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी रही है।
दूसरी ओर, DMK ने TVK और उसके प्रमुख विजय पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि हालिया प्रदर्शनों में शामिल होने के बावजूद विजय ने SIR के खिलाफ खुलकर अपना रुख क्यों नहीं रखा और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग का समर्थन क्यों नहीं किया।
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