पीएम मोदी के बिना पारित हुआ धन्यवाद प्रस्ताव, विपक्ष ने सदन में जमकर किया हंगामा

लोकसभा में विपक्ष की लगातार नारेबाजी और हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हो गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परंपरा अनुसार अपना भाषण नहीं दिया। 2004 के बाद यह पहला अवसर है जब संसद में बिना प्रधानमंत्री के भाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया।
विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष के संशोधनों को वोटिंग के लिए रखा, जो सभी खारिज कर दिए गए। इसके बाद 28 जनवरी को दिए गए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पढ़ा गया और ध्वनि मत से पारित किया गया।
विपक्ष का हंगामा:
हंगामे के दौरान कांग्रेस के सदस्य वेल में आ गए और उनके हाथों में पोस्टर थे जिन पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर के साथ ‘नरेंद्र-सरेंडर’ लिखा था। समाजवादी पार्टी के सदस्य भी वेल में पहुंचे और वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हुई तोड़-फोड़ का मुद्दा उठाया। उनके बैनरों पर रानी अहिल्याबाई होलकर की तस्वीरें थीं। तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और लेफ्ट पार्टी के सदस्य भी सदन में विरोध प्रदर्शन करते रहे।
संवैधानिक विशेषज्ञों की राय:
संवैधानिक विशेषज्ञ पी डी टी आचार्य ने इसे अभूतपूर्व घटना बताया। उन्होंने कहा कि 2004 के बाद यह पहली बार हुआ है कि प्रधानमंत्री ने धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण नहीं दिया। 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सदन में मौजूद रहकर विपक्ष के साथ बनी सहमति के तहत भाषण नहीं दिया था। उस समय यह निर्णय लिया गया था कि धन्यवाद प्रस्ताव को सीधे वोटिंग के लिए रखा जाए।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.