महिला आरक्षण कानून में संशोधन में हो सकती है देरी, सत्र समय से पहले खत्म होने की संभावना

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की योजना लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और इनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की है, लेकिन संसद के मौजूदा सत्र में यह बिल पेश होने की संभावना फिलहाल कम है। सूत्रों के अनुसार, सत्र को निर्धारित समय से पहले स्थगित किया जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा ताकि अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद इसे फिर से बुलाया जा सके।
संविधान संशोधन विधेयक कब आएगा?
सूत्रों ने बताया कि इस मसले पर अभी सभी दलों के साथ पूरी तरह बातचीत नहीं हुई है। गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ प्रमुख दलों के नेताओं से चर्चा की है, लेकिन कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के साथ बातचीत अभी बाकी है। मंगलवार शाम तक केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने भी इस विधेयक का मसौदा पेश करने का कोई प्रस्ताव नहीं था।
महिला आरक्षण का इतिहास
महिला आरक्षण का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के जरिए लाया गया था, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान शामिल है। यह व्यवस्था नए सीमांकन के बाद लागू होगी।
- प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटें 816 की जाएंगी और इनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं को आरक्षण मिलेगा।
- नए सीमांकन का आधार 2011 की जनगणना होगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सितंबर 2023 में इस कानून को मंजूरी दी थी। अगर संसद से मंजूरी मिलती है, तो ये बदलाव 31 मार्च 2029 से लागू हो सकते हैं।
संसद और राज्यसभा में महिलाओं की संख्या
यदि महिला आरक्षण लागू होता है:
- लोकसभा: वर्तमान में 543 में 78 महिलाएं हैं, संख्या बढ़कर करीब 181 हो सकती है।
- राज्यसभा: 245 सदस्यों में 32 महिला सांसद हैं, जो बढ़कर लगभग 80 हो सकती हैं।
विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण
सरकार की योजना है कि 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू किया जाए। इससे इन राज्यों की विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके बाद 2029 के लोकसभा चुनाव में भी महिला आरक्षण लागू करना आसान हो जाएगा।
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