'पीएम मोदी पर लोकसभा के अंदर हमले की थी साजिश': सूत्रों का दावा

लोकसभा के बजट सत्र के सातवें दिन (05 फरवरी) राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बिना ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह 2004 के बाद पहली बार हुआ है जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बिना पीएम के जवाब के धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में पास हुआ।
सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया कि संसद में धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर शारीरिक हमला करने की साजिश रची, जिसके चलते पीएम ने भाषण नहीं दिया। हालांकि प्रधानमंत्री संसद में मौजूद थे और बोलने के लिए तैयार थे।
भाजपा सांसद मनोज तिवारी का दावा
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण को टालने का विरोध पहले से योजना के तहत किया गया था। उनके अनुसार विपक्ष की महिला सांसदें प्रधानमंत्री की सीट के आसपास खड़ी होकर विरोध जताने लगी थीं। तिवारी ने बताया कि शाम करीब पांच बजे जब सदन फिर से शुरू हुआ, कुछ महिला सांसद ट्रेजरी बेंच की सीटों के पास पहुंचीं और बड़े बैनर पर 'डू व्हॉट इज राइट' लिखा था। यह विरोध उन आठ विपक्षी सांसदों के समर्थन में था जिन्हें एक दिन पहले निलंबित किया गया था।
विपक्ष की नारेबाजी के बीच प्रस्ताव पारित
विपक्ष की लगातार नारेबाजी और व्यवधान के बावजूद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ध्वनि मत की प्रक्रिया शुरू की और प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया। बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री के जवाब की उम्मीद थी, लेकिन विपक्षी सदस्यों के व्यवधान के कारण स्पीकर ने लोकसभा स्थगित कर दी थी।
22 साल बाद दोहराया गया इतिहास
इससे पहले साल 2004 में मनमोहन सरकार के दौरान भी ऐसा ही हुआ था, जब भाजपा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने से रोक दिया था। इस तरह 22 साल बाद इतिहास एक बार फिर दोहराया गया।
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