अनियंत्रित डायबिटीज से बढ़ सकता है ग्लूकोमा, आंखों की रोशनी पर खतरा

नई दिल्ली। डायबिटीज सिर्फ शरीर की सामान्य सेहत को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि इसका असर आंखों पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है। अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक नियंत्रित न रहे, तो यह आंखों की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा सकता है और दृष्टि कमजोर कर सकता है।
डॉ. महिपाल सिंह सचदेव, चेयरमैन और मेडिकल डायरेक्टर, सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ आई हॉस्पिटल के अनुसार, अनियंत्रित डायबिटीज के कारण ग्लूकोमा होने की संभावना बढ़ जाती है।
ब्लड शुगर का असर ब्लड वेसल्स पर
दीर्घकालिक उच्च शुगर लेवल शरीर की छोटी रक्त नलिकाओं को कमजोर करता है। आंखों की रेटिना की भी सूक्ष्म नसें इसका शिकार बनती हैं। समय के साथ ये नसें डैमेज हो जाती हैं, जिसे डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है।
असामान्य नई नसों का बनना
जैसे-जैसे यह स्थिति बढ़ती है, आंखें खुद को नुकसान से बचाने के लिए नई नसें बनाती हैं। ये नसें बेहद नाजुक होती हैं और उन हिस्सों पर विकसित होती हैं जहां से आंखों का फ्लूएड बाहर निकलता है। जब फ्लूएड का निकलना रुक जाता है, तो आंखों के अंदर दबाव बढ़ने लगता है।
आंखों के दबाव में वृद्धि और ग्लूकोमा
आंखों में जमा फ्लूएड, जिसे एक्वियस ह्यूमर कहा जाता है, के कारण आंखों का दबाव बढ़ता है। यही बढ़ा हुआ दबाव ग्लूकोमा का मुख्य कारण बनता है। इस प्रकार का ग्लूकोमा नियोवैस्कुलर ग्लूकोमा के नाम से जाना जाता है। बढ़े हुए दबाव से ऑप्टिक नर्व को चोट लगती है, जो आंखों से दिमाग तक संकेत पहुंचाने का काम करती है।
दृष्टि कमजोर होने का खतरा
यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो ऑप्टिक नर्व को होने वाला नुकसान स्थायी हो सकता है और दृष्टि कमजोर या पूरी तरह चली सकती है। विशेषकर उन लोगों में, जिनकी डायबिटीज नियंत्रित नहीं है, ग्लूकोमा विकसित होने का जोखिम अधिक होता है।
कैसे बचाव करें
आंखों की सेहत बनाए रखने के लिए तीन मुख्य कदम जरूरी हैं:
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ब्लड शुगर स्तर को हमेशा नियंत्रित और स्थिर रखें।
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आंखों की नियमित जांच करवाते रहें।
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डायबिटिक आई डिजीज के किसी भी लक्षण के तुरंत बाद उपयुक्त इलाज शुरू करें।
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