यूपी: राज्य में बिजली महंगी होने की आशंका, स्मार्ट मीटर परियोजना की लागत पर विवाद

यूपी: पावर कार्पोरेशन ने वित्त वर्ष 2026-27 के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) प्रस्ताव में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का खर्च लगभग 3,800 से 4,000 करोड़ रुपये बताया है। यदि यह लागत टैरिफ में शामिल हो गई, तो उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर में 5 से 6 फीसदी तक वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, ARR में शामिल अन्य खर्च और घाटे अलग से जुड़ेंगे।
सरकार के आदेशों के बावजूद टैरिफ में जोड़ने का प्रस्ताव
भारत सरकार ने वर्ष 2023 में स्पष्ट किया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की लागत सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाली जाएगी। ऊर्जा मंत्री ने विधानसभा में भी यह बयान दिया था कि मौजूदा मीटर हटाकर लगाए जाने वाले स्मार्ट मीटर की लागत उपभोक्ताओं से नहीं ली जाएगी। बावजूद इसके, ARR में स्मार्ट प्रीपेड मीटर का एक वर्ष का खर्च 3,800-4,000 करोड़ रुपये दिखाया गया है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जताया विरोध
इस प्रस्ताव की जानकारी मिलते ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने तीखी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि पावर कार्पोरेशन ओपेक्स मॉडल के तहत प्रति मीटर लागत उपभोक्ताओं पर डालने की कोशिश कर रहा है, जो किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कदम भारत सरकार के आदेशों का उल्लंघन है।
अवधेश वर्मा ने यह भी बताया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना के तहत पहले 18,885 करोड़ रुपये का टेंडर स्वीकृत था, जिसे बढ़ाकर 27,342 करोड़ रुपये कर दिया गया। उनका आरोप है कि इस बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने का प्रयास किया जा रहा है।
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