अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा: ट्रंप प्रशासन ने ‘इकोनॉमिक डी-डे’ शुरू करने का किया ऐलान

HIGHLIGHTS
- अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अभियान को अंतिम चरण में बताया।
- बेसेंट ने ईरान की आर्थिक जीवन-रेखाओं को निशाना बनाने की बात कही।
- अमेरिका की ओर से अब तक के सबसे बड़े वित्तीय हमले का दावा किया गया।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रविवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ अपने अभियान के ‘आखिरी चरण’ में पहुंच गया है। उन्होंने ईरान की आर्थिक जीवन-रेखाओं को खत्म करने के उद्देश्य से ‘इकोनॉमिक डी-डे’ शुरू करने की घोषणा की। बेसेंट के अनुसार, यह किसी दुश्मन देश के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला होगा।
बेसेंट ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को खत्म कर दिया है, उसकी करीब 100 प्रतिशत सैन्य फैक्ट्रियों को नष्ट कर दिया है और उसके परमाणु कार्यक्रम को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब अभियान के आखिरी चरण में प्रवेश हो रहा है और सुबह आर्थिक डी-डे शुरू होगा।
‘सुरक्षा गारंटी’ को लेकर ईरान पर गंभीर आरोप
बेसेंट ने ईरान पर सुरक्षा गारंटी का इस्तेमाल ‘वसूली’ के तौर पर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तेहरान इस धारणा पर कायम था कि ईरानी जवाबी कार्रवाई तय है, जबकि अमेरिकी सख्ती पर बातचीत की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ने सुरक्षा गारंटी के रूप में वसूली के जरिए अपना अस्तित्व बनाए रखा और यह सोच उसे ताकत देती रही कि ईरानी जवाबी कार्रवाई तय है और अमेरिकी सख्ती पर बातचीत की जा सकती है। बेसेंट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में यह दौर खत्म हो गया है।
‘हर एजेंसी और हर अधिकार का इस्तेमाल होगा’
बेसेंट ने कहा कि ट्रंप ने अमेरिकी सरकार के लिए ईरान के खिलाफ अपनी सभी शक्तियों का इस्तेमाल करने की परिस्थितियां तैयार कर दी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने हर एजेंसी, हर अधिकार और ऐसी कार्रवाई के इस्तेमाल की परिस्थितियां बनाई हैं, जिनके बारे में कई लोगों को लगता था कि अमेरिका कभी उनका इस्तेमाल नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान के शासन को बनाए रखने वाली हर आर्थिक जीवन-रेखा को काटना है, ताकि तेहरान अलग-थलग पड़ जाए।
‘आर्थिक युद्ध जारी रहा तो तेल निर्यात बंद’
इस बीच, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर ईरान के खिलाफ अमेरिका का ‘आर्थिक युद्ध’ जारी रहा, तो तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी के अन्य हिस्सों से तेल का पूरा निर्यात रोक सकता है।
रेजाई ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान का समर्थन करने या उसमें शामिल होने वाले किसी भी देश की कार्रवाई को ईरान ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानेगा।
उन्होंने कहा कि अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी के किसी भी हिस्से से तेल की एक बूंद भी निर्यात नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के आर्थिक युद्ध में किसी देश की भागीदारी या समर्थन को ईरान अपने लोगों के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई मानेगा।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका ईरान पर और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है।
घालीबाफ ने अमेरिकी प्रतिबंधों का उड़ाया मजाक
इससे पहले रविवार को ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबाफ ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नए आर्थिक प्रतिबंधों की धमकी के बाद अमेरिका पर तंज कसा।
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का असर आखिरकार उल्टा पड़ सकता है। एक्स पर एक पोस्ट में घालीबाफ ने अल्पकालिक सरकारी उपायों के जरिए गहरे वित्तीय संकट से निपटने की कोशिशों की सीमाओं पर टिप्पणी करते हुए आर्थिक दबाव के असर पर व्यंग्य किया।
उन्होंने कहा कि मांस की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए फ्रोजन मीट का आयात किया जा सकता है, लेकिन बॉन्ड, आवास और वेतन के लिए क्या फ्रोजन यील्ड, फ्रोजन घर खरीदार और फ्रोजन पेचेक आयात किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि फ्रोजन विदेश नीति से फ्रोजन अर्थव्यवस्था बनती है और एकमात्र चीज जो अभी भी चल रही है, वह ईरान का बूमरैंग है।
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