500 करोड़ से महंगी हाईवे परियोजनाओं की होगी वीडियो रिकॉर्डिंग, NHAI के निर्देश जारी

HIGHLIGHTS
- 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली हाईवे परियोजनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा।
- निर्माण शुरू होने से पूरा होने तक वीडियो रिकॉर्डिंग करानी होगी।
- ठेकेदार फर्मों को पेशेवर वीडियो एजेंसी नियुक्त करनी होगी।
नई दिल्ली। नेशनल हाईवे परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने परियोजनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का फैसला लिया है। इसके तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के निर्माण की शुरुआत से लेकर उनके पूरा होने तक की वीडियो रिकॉर्डिंग कराना अनिवार्य होगा।
एनएचएआई के निर्देशों के अनुसार, निर्माण के दौरान महत्वपूर्ण पड़ावों, सामने आने वाली चुनौतियों, उनके समाधान और मशीनों व उपकरणों के इस्तेमाल को भी रिकॉर्ड करना होगा। इस संबंध में प्राधिकरण की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
ठेकेदार फर्मों को नियुक्त करनी होगी पेशेवर वीडियो एजेंसी
एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि ठेकेदार फर्मों को परियोजना की निर्माण अवधि के लिए एक पेशेवर वीडियो निर्माण एजेंसी नियुक्त करनी होगी। यह एजेंसी निर्माण कार्य के प्रमुख चरणों, इंजीनियरिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों, उपलब्धियों, चुनौतियों और विकास को शामिल करते हुए वीडियो डॉक्यूमेंट्री तैयार करेगी।
जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, डॉक्यूमेंट्री में निर्माण कार्य की शुरुआत, कार्यस्थल की तैयारी, सर्वेक्षण, जांच, गतिशीलता, पाइल फाउंडेशन, सब-स्ट्रक्चर वर्क और पुलों, वायडक्ट्स व फ्लाईओवर के निर्माण को शामिल करना होगा। इसके अलावा गर्डर्स, पेवमेंट और सड़क निर्माण की प्रक्रिया भी रिकॉर्ड की जाएगी।
डॉक्यूमेंट्री में निर्माण के दौरान आने वाली प्रमुख चुनौतियों और बाधाओं, उनके समाधान, सुरक्षा व्यवस्था, गुणवत्ता नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के उपायों का भी विवरण देना होगा। साथ ही परियोजना के लाभ और उसके उद्देश्यों को भी इसमें दर्शाना होगा।
हाईवे निर्माण के हर महत्वपूर्ण चरण की होगी वीडियोग्राफी
प्राधिकरण के अनुसार, वीडियो रिकॉर्डिंग इस तरह की जानी चाहिए कि जरूरत पड़ने पर निर्माण प्रक्रिया के किसी भी चरण को बाद में स्पष्ट रूप से देखा जा सके। प्रत्येक परियोजना की डॉक्यूमेंट्री करीब 15 से 20 मिनट की होगी।
एनएचएआई इन डॉक्यूमेंट्री को अपनी लाइब्रेरी में सुरक्षित रखेगा। प्राधिकरण का मानना है कि इससे परियोजनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता पर निगरानी रखने में भी मदद मिल सकती है।
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