भारत-अमेरिका ट्रेड डील में किसानों के खिलाफ कौन-सी शर्त है? विरोध करने वाले संगठन स्पष्ट करें: अशोक बालियान

मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके निष्कर्ष उपलब्ध तथ्यों, आधिकारिक जानकारी और आर्थिक विश्लेषण पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई संगठन उनके विश्लेषण से असहमत है, तो उन्हें ठोस दस्तावेज़, तर्क और प्रमाण के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। केवल आशंका या अफवाह के आधार पर किसानों को भ्रमित करना उचित नहीं है।
अशोक बालियान ने बताया कि कुछ समूह किसानों के बीच यह धारणा फैला रहे हैं कि यह ट्रेड डील भारतीय कृषि के लिए नुकसानदेह होगी। जबकि किसी भी दो देशों के बीच व्यापार समझौते का उद्देश्य निर्यात-आयात को आसान बनाना, बाजार का विस्तार करना, निवेश और तकनीक लाना तथा रोजगार के अवसर बढ़ाना होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित ट्रेड डील में भारत ने अनाज, डेयरी, दाल-तेलहन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। वहीं, मसाले, फल-सब्ज़ियाँ, प्रोसेस्ड फूड, चाय और कॉफ़ी जैसे क्षेत्रों में भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धात्मक ताकत है, जो शून्य निर्यात शुल्क पर अमेरिका भेजी जा सकेंगी।
बालियान ने बताया कि भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार में प्राथमिकता वाला साझेदार बनने का अवसर मिला है। इसके तहत वस्त्र और परिधान पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत, रेशम को 0 प्रतिशत आयात शुल्क पर अमेरिकी बाजार में पहुंच मिला है।
इसके अलावा:
1.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर के भारतीय कृषि निर्यात पर अमेरिका में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं।
1.035 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कृषि उत्पादों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका ने शून्य पारस्परिक शुल्क का आश्वासन दिया है।
13 बिलियन अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी बाज़ार वाले प्रोडक्ट्स (जैसे सीटें, झूमर, रोशन साइन और लैंप पार्ट्स) के लिए 0 प्रतिशत ड्यूटी एक्सेस हासिल की गई है।
यह समझौता भारत के पक्ष में शुल्क में स्पष्ट अंतर पैदा करता है। जहां भारतीय उत्पादों पर शुल्क कम हुआ, वहीं कई अन्य देश जैसे चीन (35%), वियतनाम (20%), बांग्लादेश (20%), मलेशिया (19%), इंडोनेशिया (19%), फिलीपींस (19%), कंबोडिया (19%) और थाईलैंड (19%) अभी भी अमेरिका में अधिक शुल्क का सामना कर रहे हैं।
बालियान ने जोर देकर कहा कि इससे भारतीय कृषि निर्यातकों को स्थिरता और अनुमान लगाने में आसानी होगी और प्रमुख कृषि उत्पादों को बिना किसी रुकावट के बाज़ार तक पहुँच सुनिश्चित होगी।
अंत में उन्होंने सभी से अपील की कि देशहित और किसानहित पर गंभीर चर्चा तथ्यों के आधार पर हो, अफवाहों के आधार पर नहीं। लोकतंत्र में बहस तथ्यों से होती है, असत्य प्रचार से नहीं।
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