योगी के दिल्ली दौरे से यूपी की राजनीति में हलचल, मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया दिल्ली यात्रा को भले ही औपचारिक मुलाकातों का दौर बताया जा रहा हो, लेकिन इसके सियासी मायने यूपी की राजनीति में साफ दिखने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से हुई इन बैठकों ने मंत्रिमंडल विस्तार और भाजपा के प्रदेश संगठन में संभावित बदलावों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।
भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बैठक में योगी सरकार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार पर विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद संगठनात्मक ढांचे में फेरबदल को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अपने सुझाव साझा किए। हाल ही में मुख्यमंत्री आवास पर सरकार और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की कोर कमेटी बैठक हुई थी, जिसे नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ परिचयात्मक बैठक बताया गया था।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष भी मौजूद थे और मंत्रिमंडल विस्तार तथा संगठनात्मक बदलावों पर मंथन हुआ था। बैठक की रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाई गई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से सीधे संवाद किया।
खाली पदों पर जल्द हो सकती है नियुक्ति
वर्तमान में योगी मंत्रिमंडल में कुल 54 मंत्री हैं, जबकि छह पद अब भी रिक्त हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार के तहत छह विधायकों को मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष जोर हो सकता है। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सहित कुछ अन्य नेताओं के नाम भी चर्चाओं में हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी नाम की पुष्टि नहीं हुई है।
दावेदारों की बढ़ी हलचल
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के बाद मंत्री पद की आस लगाए विधायकों की सक्रियता तेज हो गई है। कई विधायक पहले से ही राजधानी में संपर्क साधने में जुटे हैं। इनमें कुछ ऐसे नेता भी शामिल हैं, जो पहले प्रदेश अध्यक्ष बनने की दौड़ में थे, लेकिन वहां मौका नहीं मिलने के बाद अब मंत्रिमंडल में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, योगी आदित्यनाथ की दिल्ली यात्रा ने यूपी की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में सरकार व संगठन दोनों में बड़े फैसलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
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