'लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष जरूरी, नियम सबसे ऊपर', लोकसभा में बोले ओम बिरला

नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला आज पहली बार अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा के बाद आसन पर आए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना अत्यंत जरूरी है और संसद में नेता प्रतिपक्ष को कभी भी बोलने से नहीं रोका गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के नियम सर्वोपरि हैं और कोई भी व्यक्ति इन नियमों से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों।
सदस्यों के विचारों को मिला पर्याप्त मंच
बिरला ने बताया कि पिछले दो दिनों में सदन में 12 घंटे से अधिक बहस हुई, ताकि सभी सांसद अपनी जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं को सामने रख सकें। उन्होंने कहा, “सदन 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। मैंने हमेशा कोशिश की कि हर सांसद नियमों के तहत अपनी बात रखे। जो सदस्य कम बोलते थे, उन्हें भी बोलने के लिए प्रोत्साहित किया गया, क्योंकि बोलना लोकतंत्र को मजबूत करता है।”
स्पीकर ने सदन को विचारों का जीवंत मंच बताते हुए कहा कि पिछले दो दिन में सभी सांसदों की बातों को गंभीरता से सुना गया। उन्होंने कहा, “हर सदस्य का आभारी हूं, चाहे वे आलोचक ही क्यों न रहे हों। यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की भावना का प्रतिनिधि है।”
नियमों के भीतर बोलने का अधिकार
कुछ सदस्यों द्वारा नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोके जाने की शिकायत पर बिरला ने कहा कि किसी को भी नियमों के तहत बोलने से रोकना सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के नियमों का पालन अनिवार्य है, चाहे प्रधानमंत्री ही क्यों न हों। नियम 372 के तहत उन्हें भी स्पीकर की अनुमति लेना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि चर्चा के दौरान माइक बंद करने के आरोप निराधार हैं। स्पीकर के पास माइक बंद करने का कोई बटन नहीं होता। विपक्ष के कई सदस्य इस बारे में जानते हैं।
महिला सांसदों को भी पर्याप्त अवसर
बिरला ने महिला सदस्यों के योगदान पर गर्व जताया और कहा कि उनके कार्यकाल में सभी महिला सांसदों को अपनी बात रखने का मौका मिला। बजट चर्चा के दौरान कुछ महिला सांसदों ने सत्ता पक्ष की बेंच की ओर जाकर नारेबाजी की, जो अप्रत्याशित घटना थी। इस पर स्पीकर ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित नेताओं को रोकने का निर्देश दिया।
निलंबन और सदन की गरिमा
बिरला ने कहा कि निलंबन जैसे कठोर कदम सदन की व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी होते हैं। उन्होंने सभी सांसदों से व्यक्तिगत संबंध बनाए रखने की बात कही, लेकिन कहा कि सदन की मर्यादा और संचालन सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है।
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