हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अभिषेक बनर्जी, विदेश में इलाज की मांगी अनुमति

HIGHLIGHTS
- कलकत्ता हाई कोर्ट ने विदेश जाकर इलाज कराने की अनुमति देने से इनकार किया था।
- हाई कोर्ट ने एसएसकेएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के सामने जांच कराने की बात कही थी।
- मेडिकल बोर्ड की विशेषज्ञ राय के आधार पर विदेश में इलाज की जरूरत का आकलन किया जाना था।
नई दिल्ली। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं देने के कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि वह एसएसकेएम अस्पताल में गठित मेडिकल बोर्ड के सामने अपनी स्वास्थ्य स्थिति की जांच कराने के लिए तैयार नहीं थे।
हाई कोर्ट का कहना था कि मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही यह तय किया जा सकता है कि अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की जरूरत है या नहीं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को उनकी याचिका पर एक सप्ताह के भीतर सुनवाई करने का निर्देश दिया था।
यह मामला अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और जांच के दौरान विदेश यात्रा की अनुमति से जुड़ी शर्तों के बीच चल रहा है।
हाई कोर्ट ने अनुमति क्यों नहीं दी?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा था कि डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी अपनी मेडिकल स्थिति की जांच के लिए कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में गठित मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए तैयार नहीं थे।
याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि जब बनर्जी मेडिकल बोर्ड के सामने जांच कराने को तैयार नहीं हैं, तो उनकी याचिका के जरिए उठाए गए मुद्दे को आगे लंबित रखने का कोई आधार नहीं है।
मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होते तो क्या होता?
हाई कोर्ट के मुताबिक, अगर अभिषेक बनर्जी मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होते, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय के आधार पर अदालत यह आकलन कर सकती थी कि आंखों के इलाज के लिए उन्हें विदेश जाने की वास्तविक आवश्यकता है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था?
3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट को अभिषेक बनर्जी की विदेश जाकर आंखों का इलाज कराने की अनुमति संबंधी याचिका पर एक सप्ताह के भीतर सुनवाई करने को कहा था।
उस दौरान बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि याचिका में हाई कोर्ट के आदेश में बदलाव की मांग की गई है, ताकि टीएमसी सांसद को मेडिकल इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मिल सके।
पहले हाई कोर्ट से क्या राहत मिली थी?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने इससे पहले अभिषेक बनर्जी को जबरन कार्रवाई से मिली अंतरिम सुरक्षा को 6 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था। यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले 27 अप्रैल को हुई एक जनसभा के दौरान विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित टिप्पणियों से संबंधित था।
हाई कोर्ट ने राहत देते हुए बनर्जी को जांच में सहयोग करने और पहले के आदेश के अनुसार अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करने का निर्देश दिया था।
अंतरिम सुरक्षा पर हाई कोर्ट का आदेश
हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की अंतरिम सुरक्षा 6 अक्टूबर तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, बढ़ाई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि अंतरिम सुरक्षा की शर्तों में बदलाव की मांग वाली टीएमसी नेता की याचिका पर अगस्त में सुनवाई की जाएगी। हालांकि, उस समय सुनवाई के लिए कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई थी।
विदेश में इलाज को लेकर हाई कोर्ट का रुख
हाई कोर्ट ने पहले कहा था कि जांच जारी रहने के दौरान वह याचिकाकर्ता को विदेश यात्रा की अनुमति देने के पक्ष में नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि कोलकाता में आंखों के इलाज के लिए कई प्रतिष्ठित और नामी क्लिनिक उपलब्ध हैं।
किस एफआईआर से जुड़ा है मामला?
अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की भी मांग की थी। यह एफआईआर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले 27 अप्रैल को आयोजित एक जनसभा में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई कथित टिप्पणियों से संबंधित है।
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