अखिलेश यादव की चुनाव आयोग से मांग, ERO नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित हों फॉर्म-6, 7 और 8

HIGHLIGHTS
- सोमवार को लखनऊ में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
- प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में ये फॉर्म जमा होते हैं।
- कुल 1 लाख 77 हजार 516 मतदेय स्थलों का ज्ञापन में उल्लेख किया गया।
लखनऊ। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से मांग की है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम हटाने और विवरण में संशोधन से संबंधित फॉर्म ईआरओ के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किए जाएं। इस संबंध में अखिलेश यादव की ओर से सोमवार को लखनऊ में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में मौजूद 1 लाख 77 हजार 516 मतदेय स्थलों पर ये फॉर्म जमा किए जाते हैं। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम जोड़ने, फॉर्म-7 का नाम हटाने और फॉर्म-8 का विवरण संशोधित या परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।
ज्ञापन के अनुसार, इन फॉर्मों की एक प्रति ईआरओ यानी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर सात दिनों तक प्रदर्शित करना अनिवार्य है, ताकि इस अवधि के दौरान आपत्तियां दाखिल की जा सकें। भारत निर्वाचन आयोग के मार्च-2023 के मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल्स में भी इस व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 10 अप्रैल 2026 को हुआ था। इसके बाद 11 अप्रैल से रोजाना ये फॉर्म जमा किए जा रहे हैं। नाम जोड़ने और हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-6 और फॉर्म-7 जमा होने की बात कही गई है।
समाजवादी पार्टी का कहना है कि प्रत्येक नाम की सत्यता की जांच बेहद जरूरी है। पार्टी के मुताबिक इससे मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने में मदद मिलेगी।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में ईआरओ के पास ये फॉर्म प्राप्त हो रहे हैं, लेकिन ईआरओ इन फॉर्मों को अपने नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित नहीं कर रहे हैं। सपा ने आरोप लगाया है कि भारत निर्वाचन आयोग इस मामले में मूकदर्शक बना हुआ है।
अखिलेश यादव की ओर से ज्ञापन प्रदेश सचिव और वरिष्ठ अधिवक्ता केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चंद्र सिंह यादव और राधेश्याम सिंह ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा।
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