बीरभूम में गरजे अमित शाह, कहा- पांच मई को बनने वाली है भाजपा सरकार

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ी चुनावी रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राज्य की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि आगामी चुनावों में भाजपा मजबूत स्थिति में आएगी।
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि वह पूरे बंगाल का दौरा कर बीरभूम पहुंचे हैं और जनता का रुझान भाजपा के पक्ष में दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता बदलाव का मन बना चुकी है और आने वाले चुनावों में भाजपा को समर्थन देगी।
टीएमसी पर तीखे आरोप
रैली के दौरान शाह ने ममता बनर्जी सरकार पर कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में भय और हिंसा का माहौल बनाया गया है, जिसे जनता अब स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि लोग मतदान के जरिए इसका जवाब देंगे।
अमित शाह ने कटमनी और सिंडिकेट राज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम लोगों को निर्माण कार्यों से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने वादा किया कि भाजपा सरकार बनने पर ऐसे तंत्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घुसपैठ और सुरक्षा का मुद्दा
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में घुसपैठ और सीमा सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा और आवश्यक होने पर बाड़ लगाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जहां महिलाएं किसी भी समय सुरक्षित महसूस कर सकें।
चुनावी कार्यक्रमों की श्रृंखला
अमित शाह दिनभर पश्चिम बंगाल में कई कार्यक्रमों में शामिल रहे। उन्होंने बीरभूम और पश्चिम बर्धमान में जनसभाएं कीं, जबकि दुर्गापुर में रोड शो और संगठनात्मक बैठक में भी हिस्सा लिया।
टीएमसी और अन्य दल भी सक्रिय
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी बीरभूम और अन्य क्षेत्रों में चुनावी सभाएं कर रही हैं। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी विभिन्न जिलों में रैलियों के जरिए प्रचार में जुटे हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई
इसी बीच एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी प्रस्तावित है, जिसमें मतदाता सूची से जुड़े लाखों लोगों के मतदान अधिकार को लेकर फैसला होना है। इस पर अदालत का निर्णय चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
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