बरेली: मानव तस्करी गैंग ने नाबालिग को बनाया शिकार, होटल में कराया देह व्यापार

बरेली: बरेली के सेटेलाइट बस अड्डे और पीलीभीत रोड के आसपास कई होटल अब अनौपचारिक रूप से देह व्यापार रैकेट के साथ जुड़े पाए गए हैं। यह सनसनी तब फैली, जब वाराणसी की नाबालिग किशोरी से जुड़े गिरोह के सदस्य पकड़े गए। आरोपियों के भागने के बाद पुलिस उनके ठिकानों और भागीदारों की तलाश में जुटी है।
पीड़िता का परिवार और हालात
पीड़िता के परिवार की जानकारी जुटाने के दौरान सामने आया कि किशोरी के पिता दिव्यांग हैं और दो भाई मजदूरी करते हैं। किशोरी ने पुलिस को बताया कि वह घर लौटने की कोशिश करती, लेकिन आरोपियों द्वारा उसे पीटा जाता। रोने या विरोध करने पर बबली, विनोद और खलील नाम के आरोपी उसे मारते थे। किशोरी की देखभाल और खाना भी सिर्फ औपचारिक रूप से दिया जाता था, जबकि उसकी कमाई पूरी तरह बबली के पास रहती थी।
गिरोह और सरगना का नेटवर्क
जांच में पता चला कि गिरोह की मुखिया बबली खान उर्फ नेहा यादव थी। वह कम उम्र की लड़कियों को खरीदकर उनसे देह व्यापार कराती थी। किशोरी को वाराणसी से खरीदा गया और ग्राहकों को इंस्टाग्राम व टेलीग्राम अकाउंट्स पर तस्वीरें भेजी जाती थीं। ग्राहकों के चयन के बाद सौदा व्हाट्सएप कॉल पर तय होता। गिरोह में अन्य सहयोगियों का काम लड़की को ले-आने और भेजने का था, ताकि वह भाग न सके।
होटल संचालकों की मिलीभगत
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि सेटेलाइट बस अड्डे के मूडी मून, लिटिल क्राउन, पीलीभीत बाइपास का ग्रीन एप्पल होटल और मामा-भांजा रेस्टोरेंट जैसे कई होटल संचालक रैकेट के साथ जुड़े थे। इन होटल में लड़कियों का बेरोकटोक आवागमन होता था और नाबालिगों के दस्तावेजों की जांच नहीं की जाती थी।
फर्जी दस्तावेजों से बालिग दिखाया गया
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि किशोरी की असली जन्मतिथि 2011 है, लेकिन गिरोह ने उसे फर्जी आधार कार्ड से 2007 का दिखा कर बालिग प्रस्तुत किया। होटल प्रबंधन ने दस्तावेजों की जाँच करने की आवश्यकता नहीं समझी। लिटिल क्राउन होटल के संचालक अब फरार हैं और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस का कहना है कि किशोरी और उसके परिवार को सुरक्षित रखने के लिए कार्रवाई तेज कर दी गई है और आरोपी जल्द ही पकड़ में लाए जाएंगे।
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