शुकतीर्थ में भागवत कथा का शुभारंभ, स्वामी ओमानंद महाराज ने किया दीप प्रज्ज्वलन

मुजफ्फरनगर। शुक्रताल (शुकतीर्थ) स्थित श्री शुकदेव आश्रम के प्रत्यक्षानंद भागवत भवन में भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस धार्मिक आयोजन का आयोजन पुणे, महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं द्वारा किया गया। कथा का उद्घाटन आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी ओमानंद महाराज ने नागपुर से पधारे कथावाचक आचार्य मोहन कुबेर का व्यासपीठ पर सम्मान किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के विद्वान संत स्वामी कृष्णानंद द्वारा रचित पुस्तक ‘शुक उवाच’ का भी लोकार्पण किया गया। यह ग्रंथ श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध में भगवान श्रीकृष्ण और उद्धव के संवादों पर केंद्रित है।
स्वामी ओमानंद महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाराष्ट्र संत परंपरा, भक्ति और शौर्य की भूमि रही है। उन्होंने बताया कि इसी प्रदेश ने संत तुकाराम, संत एकनाथ, संत ज्ञानेश्वर, संत रामदास और संत नामदेव जैसे महान संतों को जन्म दिया, जिनकी साधना और विचारधारा आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी भूमि पर जन्मे छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने पराक्रम, आत्मबल और आध्यात्मिक चेतना से न केवल समाज को दिशा दी, बल्कि भारतीय इतिहास को भी नई पहचान प्रदान की।
महाराज ने कहा कि संत साहित्य सदियों से लोककल्याण का कार्य करता आ रहा है। संत तुकाराम की रचनाओं में भागवत प्रेम की अनुभूति होती है, वहीं संत ज्ञानेश्वर की ‘ज्ञानेश्वरी’ ने गीता के उपदेशों को सरल रूप में जनसाधारण तक पहुंचाया। उन्होंने शिवाजी महाराज के जीवन को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि वे वीरता, न्याय और नीति के प्रतीक थे, जिनके आचरण से विरोधी भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहते थे।
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