सोमनाथ जीर्णोद्धार पर नेहरू के रुख को भाजपा ने बताया ‘विरोधात्मक’

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीति पर तीखी आलोचना की। त्रिवेदी का कहना है कि ऐतिहासिक आक्रांताओं जैसे महमूद गजनवी और अलाउद्दीन खिलजी ने मंदिर को केवल भौतिक रूप से क्षतिग्रस्त किया था, लेकिन नेहरू के मन में भगवान सोमनाथ के प्रति विशेष नापसंदगी थी।
सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर नेहरू द्वारा कथित तौर पर पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखे पत्र को साझा किया। भाजपा नेता का दावा है कि इस पत्र में नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के इतिहास को झूठा बताया और लियाकत अली खान को ‘प्रिय नवाबजादा’ कहकर संबोधित किया। त्रिवेदी ने इसे भारत की सभ्यतागत विरासत के प्रति नेहरू की उपेक्षा के रूप में देखा।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और मंत्रिमंडल के सहयोगियों को पत्र लिखकर पुनर्निर्माण की आवश्यकता पर सवाल उठाए। उन्होंने उद्घाटन समारोह में शामिल न होने की सलाह भी दी थी।
त्रिवेदी का दावा है कि नेहरू ने सभी मुख्यमंत्रियों को दो बार पत्र लिखकर यह शिकायत की कि मंदिर के पुनर्निर्माण से विदेशों में भारत की छवि प्रभावित हुई। साथ ही उन्होंने तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री आर.आर. दिवाकर को पत्र लिखकर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के प्रचार-प्रसार को कम करने और इसे ‘आडंबरपूर्ण’ बताने का आग्रह किया।
यह राजनीतिक बहस ऐसे समय में सामने आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ समारोह में भाग लेने के लिए सोमनाथ मंदिर जाएंगे। यह पर्व 8 जनवरी से 11 जनवरी तक मनाया जाएगा और इस दौरान भारत की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक गौरव को प्रदर्शित करने वाले कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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