अहमदाबाद में ‘ब्लैक ब्लड’ ठगी का खुलासा, बुजुर्गों को निशाना बनाता था गैंग

अहमदाबाद। गुजरात की राजधानी में साइबर क्राइम ब्रांच ने एक शातिर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो इलाज के नाम पर बुजुर्गों को डराकर उनसे लाखों रुपये ऐंठ रहा था। यह गिरोह खुद को डॉक्टरों से जुड़ा बताकर वरिष्ठ नागरिकों को धोखे में डालता था।
इस पूरे मामले का खुलासा बैंक ऑफ बड़ौदा के एक शाखा प्रबंधक की सतर्कता से हुआ। एक बुजुर्ग ग्राहक लगातार दो दिनों से अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट से बड़ी राशि निकालने बैंक आ रहा था। संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए शाखा प्रबंधक को आशंका हुई कि बुजुर्ग किसी ऑनलाइन या मानसिक दबाव वाली ठगी का शिकार हो सकता है।
सीसीटीवी से पकड़ में आया आरोपी
मैनेजर की सूचना पर पुलिस इंस्पेक्टर जेपी ठाकोर अपनी टीम के साथ बैंक पहुंचे। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति बार-बार बुजुर्ग पर नजर रखते हुए दिखाई दिया। पुलिस ने मौके से 35 वर्षीय मोहम्मद अमजद को हिरासत में लिया, जिसने पूछताछ में पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली उजागर की।
इस तरह बनाते थे शिकार
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अस्पतालों, बाजारों और सत्संग स्थलों पर ऐसे बुजुर्गों को चिन्हित करता था, जिन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती थी। आरोपी पहले मददगार बनकर उनका भरोसा जीतते और फिर एक कथित मशहूर विशेषज्ञ डॉक्टर ‘दीवान’ का नाम लेकर इलाज का झांसा देते थे।
गैंग का एक सदस्य फोन पर खुद को पुराने मरीज के रूप में पेश करता और दावा करता कि उसकी मां को इसी डॉक्टर ने ठीक किया है, जबकि अन्य जगहों पर लाखों खर्च करने के बाद भी राहत नहीं मिली थी।
‘काला खून’ निकालने का डर
विश्वास जीतने के बाद आरोपी बुजुर्गों के घर जाकर इलाज का नाटक करते। सुई चुभाकर ‘काला खून’ निकलने की कहानी सुनाई जाती और कहा जाता कि शरीर में जमा यही खून बीमारी की जड़ है। गिरोह एक-एक बूंद निकालने की कीमत 7 हजार रुपये बताता था।
अहमदाबाद में एक बुजुर्ग से इस तरह करीब चार लाख रुपये वसूले जा चुके थे। अतिरिक्त 2.5 लाख रुपये देने के लिए जब पीड़ित बैंक पहुंचा, तब यह पूरा मामला उजागर हुआ।
जांच जारी
पुलिस का कहना है कि इस ठगी गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और मामले की गहन जांच की जा रही है।
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