लखनऊ में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति बाधित, ढाबों-रेस्टोरेंटों पर संकट

लखनऊ। व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति पर रोक लगने से राजधानी लखनऊ में खानपान से जुड़े कारोबार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव स्ट्रीट फूड वेंडरों, छोटे रेस्टोरेंटों और ढाबा संचालकों पर पड़ सकता है, क्योंकि उनके पास गैस का सीमित स्टॉक ही होता है। ऐसे में एक-दो दिन में सिलिंडर खत्म होने की स्थिति बन सकती है, जिससे इन पर निर्भर बड़ी आबादी को भोजन की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
लखनऊ में बड़ी संख्या में बाहर से आए कामकाजी लोग और छात्र रहते हैं। अनुमान के अनुसार करीब 25 हजार से अधिक विद्यार्थी शहर में रहकर पढ़ाई करते हैं और इनमें से अधिकांश भोजन के लिए छोटे रेस्टोरेंट, ढाबों और टिफिन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। होटल और रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े चारबाग के व्यवसायी अनिल विरमानी का कहना है कि अगर गैस की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रही तो मजदूरों, कर्मचारियों और छात्रों जैसे वर्गों के सामने खाने की समस्या खड़ी हो सकती है। इसके अलावा इससे छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ेगा।
छात्रावासों की मेस में सीमित गैस भंडार
लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रावासों में रहने वाले करीब दो हजार छात्र-छात्राओं के भोजन की व्यवस्था भी मेस पर निर्भर है। फिलहाल मेस में गैस का भंडार सीमित है, जो अधिकतम एक सप्ताह तक चल सकता है। विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर और जानकीपुरम स्थित नए परिसर को मिलाकर कुल 18 छात्रावास हैं।
चीफ प्रोवोस्ट प्रो. अनूप कुमार सिंह के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना का पहले अनुमान नहीं था। अगर आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो मेस संचालन में दिक्कत आ सकती है, हालांकि विद्यार्थियों के भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
अन्य शिक्षण संस्थानों पर भी असर की आशंका
गोमतीनगर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, अटल आवासीय विद्यालय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के छात्रावासों में रहने वाले करीब 1800 विद्यार्थियों के भोजन पर भी इस स्थिति का असर पड़ सकता है, क्योंकि वे पूरी तरह मेस पर निर्भर हैं। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. सर्व नारायण झा ने बताया कि छात्रावास में रोजाना करीब दस सिलिंडर की जरूरत होती है, लेकिन सोमवार को केवल तीन सिलिंडर ही मिल सके।
कुछ विश्वविद्यालयों में फिलहाल राहत
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) और डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में फिलहाल गैस की उपलब्धता लगभग 12 दिन तक के लिए सुनिश्चित बताई जा रही है। बीबीएयू की प्रवक्ता डॉ. रचना गंगवार के अनुसार यह व्यवस्था ठेकेदारों द्वारा की जाती है। वहीं पुनर्वास विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. यशवंत वीरोदय ने कहा कि अभी कैंटीन संचालकों को कोई बड़ी परेशानी नहीं है, लेकिन यदि संकट लंबा चला तो स्थिति बदल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो शहर में भोजन सेवाओं और उससे जुड़े हजारों लोगों के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
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