पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, केंद्र सरकार पर साधा निशाना

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच शांति प्रयासों की हलचल तेज हो गई है, लेकिन इसी दौरान भारत में राजनीतिक बयानबाजी भी गर्मा गई है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और कूटनीतिक रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि हाल के घटनाक्रमों में पाकिस्तान की भूमिका फिर से उभरकर सामने आई है, जिसे पहले भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिश की थी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति भारत की विदेश नीति की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को अलग-थलग करने के प्रयासों के बावजूद उसकी नई कूटनीतिक भूमिका कई गंभीर प्रश्न छोड़ती है।
जयराम रमेश ने पूर्ववर्ती सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता हासिल की थी, जबकि वर्तमान स्थिति उस तुलना में कमजोर दिखाई देती है।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक पहुंच और बड़े वैश्विक आयोजनों के बावजूद पाकिस्तान को एक नई मध्यस्थ भूमिका कैसे मिल गई। कांग्रेस नेता ने अप्रत्यक्ष रूप से सरकार की विदेश नीति की शैली और प्रभावशीलता पर भी टिप्पणी की।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वार्ताएं चल रही हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के प्रयास पाकिस्तान की मध्यस्थता में आगे बढ़ रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बना हुआ है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और ऊर्जा व्यापार का यह अहम मार्ग अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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