दल-बदल विवाद: आप ने की 7 सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग

HIGHLIGHTS
- देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है।
- आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है।
- इस कदम को लेकर विपक्षी दल केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बता रहे हैं।
- इसी बीच आम आदमी पार्टी ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है।
- पार्टी नेता संजय सिंह ने जानकारी दी है कि AAP ने राज्यसभा के सभापति से इन सातों सांसदों की…
देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। इस कदम को लेकर विपक्षी दल केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बता रहे हैं।
इसी बीच आम आदमी पार्टी ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी नेता संजय सिंह ने जानकारी दी है कि AAP ने राज्यसभा के सभापति से इन सातों सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जो सांसद संगठन छोड़ चुके हैं, उन्हें सदन की सदस्यता पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने के बावजूद सांसद पद पर बने रहना लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह मामला अब औपचारिक रूप से सभापति के समक्ष रखा गया है और आगे की कार्रवाई उनकी ओर से तय की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) चर्चा में आ गया है। यह कानून 1985 में संविधान के 52वें संशोधन के तहत लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य चुने हुए प्रतिनिधियों को चुनाव के बाद पार्टी बदलने से रोकना है, ताकि जनता के जनादेश का सम्मान बना रहे।
इस कानून के तहत यदि कोई सांसद या विधायक अपनी पार्टी छोड़ता है या पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित सदन के सभापति या अध्यक्ष द्वारा लिया जाता है, जो सभी तथ्यों की जांच के बाद फैसला सुनाते हैं।
वहीं कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे पार्टी का विलय या बड़े समूह में अलग होना, अपवाद भी दिए गए हैं। लेकिन मौजूदा स्थिति में AAP सांसदों के मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सभापति इस पर क्या निर्णय लेते हैं।
फिलहाल इस सियासी विवाद पर सभी की नजरें टिकी हैं और आने वाले दिनों में यह मामला और राजनीतिक रूप से गरमा सकता है।
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