शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 320 अंक लुढ़का; निफ्टी 24,500 के नीचे

HIGHLIGHTS
- शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 78,204.40 के स्तर पर पहुंचा।
- निफ्टी 94.35 अंक गिरकर 24,490.85 पर रहा।
- ब्रेंट क्रूड 87.61 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
नई दिल्ली। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 320.14 अंक टूटकर 78,204.40 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 94.35 अंक गिरकर 24,490.85 पर आ गया।
वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.13 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 87.61 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे कमजोर होकर 95.38 के स्तर पर पहुंच गया।
सेंसेक्स पैक में इंटरग्लोब एविएशन, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, इटरनल और बजाज फाइनेंस के शेयरों में गिरावट रही। वहीं, टाइटन, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और इंफोसिस बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर के मुताबिक, भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका असर वॉल स्ट्रीट के कमजोर बंद होने और एशियाई बाजारों की सुस्त शुरुआत के रूप में दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि निवेशकों की भावनाएं अभी नियंत्रित हैं और बातचीत अब अधिक जटिल चरण में पहुंच गई है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से मुआवजे की मांग की है, जबकि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की शर्तों को दोहराया है। इससे किसी संभावित समझौते के समय और उसके स्थायित्व को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। जब तक स्थिति पर अधिक स्पष्टता नहीं आती, बाजार सुर्खियों से प्रभावित रह सकते हैं और निवेशक आक्रामक रुख अपनाने से बच सकते हैं।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का क्या हाल रहा?
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक बढ़त में रहा। वहीं, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट में कारोबार करते रहे। इससे पहले अमेरिकी बाजार सोमवार को नुकसान के साथ बंद हुए थे।
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसलवन राधाकृष्णन ने कहा कि बाजार के प्रतिभागी फिलहाल इंतजार करो और देखो की रणनीति अपना सकते हैं। घरेलू आय का मौसम शेयर-विशिष्ट गतिविधियों का प्रमुख आधार बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि निकट अवधि में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें व्यापक बाजार की तेजी को सीमित कर सकती हैं और तेल-संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव बना रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह क्या है?
डब्ल्यूटीआई क्रूड फिर से 82 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ गया है, जबकि ब्रेंट क्रूड 87 अमेरिकी डॉलर से ऊपर कारोबार कर रहा है। यह स्थिति होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संभावित व्यवधानों को लेकर जारी चिंताओं को दर्शाती है।
भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी गतिरोध से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों को आशंका है कि आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
विदेशी निवेशकों का क्या रुख रहा?
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 1,974.76 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह जानकारी एक्सचेंज के आंकड़ों से सामने आई है।
सोमवार को सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 फीसदी की बढ़त के साथ 78,542.44 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 13.15 अंक यानी 0.05 फीसदी बढ़कर 24,583.80 पर बंद हुआ था।
हालांकि, मंगलवार के शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट देखने को मिली। विदेशी निवेशकों की खरीदारी के बावजूद बाजार पर दबाव बना रहा और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के साथ कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा को प्रभावित करती रहीं।






























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