जाट इंटर कॉलेज में दानदाताओं का सम्मान, जमीन के कब्जे पर उठे सवाल

मुजफ्फरनगर। सर्कुलर रोड स्थित जाट इंटर कॉलेज में रविवार को दानदाताओं को सम्मानित करने के लिए एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उन दानदाताओं को मोमेंटो और पटका पहनाकर सम्मानित किया गया, जिन्होंने कॉलेज के जीर्ण-शीर्ण भवनों के नवीनीकरण में योगदान दिया। वहीं, कार्यक्रम में कॉलेज की जमीन को लेकर उठ रही विवादास्पद मामलों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।
प्रधानाचार्य योगेंद्र सिंह मलिक ने बताया कि उन्होंने 1 अप्रैल से कॉलेज का कार्यभार संभाला। उसी समय जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने आदेश दिया कि कॉलेज की सभी कक्षाएं केवल चार कमरों में संचालित की जाएं, जबकि 14 सेक्शनों की पढ़ाई हो रही थी। यह चुनौतीपूर्ण स्थिति थी, जिसे पार करने के लिए शिक्षकों ने छह से सात लाख रुपये इकट्ठा कर जर्जर कमरों की मरम्मत कराई।
इसके बाद समाजसेवी अमित चौधरी, सचिन राणा और विनय पवार ने नए कमरे बनवाने का बीड़ा उठाया, जिससे कॉलेज की पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आई। जिला विद्यालय निरीक्षक ने भी इस प्रयास को सराहते हुए 11,000 रुपये का योगदान दिया।
प्रधानाचार्य ने यह भी बताया कि 3 अगस्त को भी दानदाताओं को सम्मानित किया गया था। समाज की निरंतर सहयोग भावना के चलते अब नए दानदाताओं को सम्मान देने का अवसर मिला। 2 जनवरी को कॉलेज स्थापना दिवस पर पुराने छात्रों का सम्मेलन आयोजित करने की भी योजना है।
कार्यक्रम में मौजूद जाट महासभा के अध्यक्ष धर्मवीर बालियान ने समाज की सहयोगी भावना की प्रशंसा की और कहा कि यह संस्था बुजुर्गों की धरोहर है, जिसे बचाने में समाज के भामाशाहों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हालांकि, बालियान ने कॉलेज की जमीन को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि कॉलेज के पास लगभग 40 एकड़ भूमि थी, जिसका एक बड़ा हिस्सा अब कब्जे में है या अवैध रूप से हस्तांतरित किया जा चुका है। उन्होंने 1964 के कानून का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी संस्था अपनी जमीन किसी दूसरी संस्था को नहीं ट्रांसफर कर सकती।
बालियान ने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। जाट महासभा मार्च महीने में इस प्रकरण को दस्तावेजों के साथ न्यायालय और प्रशासन के समक्ष उठाएगी और जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए अभियान चलाएगी।
समारोह में मौजूद सभी वक्ताओं ने दानदाताओं के योगदान की सराहना की और समाज से आगे भी इस शैक्षणिक धरोहर की सेवा में सहयोग देने की अपील की।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.