'पढ़े-लिखे भी बन रहे शिकार': डिजिटल अरेस्ट पर सीजेआई सूर्यकांत ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने देश में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” साइबर फ्रॉड मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि उच्च शिक्षित और जागरूक माने जाने वाले लोग भी इस तरह की ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची भी शामिल थे, इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटारमानी ने अदालत को बताया कि सरकार इस मुद्दे पर लगातार बैठकें कर रही है और साइबर अपराध रोकने के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने मामले को 12 मई को सूचीबद्ध करने का आग्रह भी किया।
बुजुर्ग महिला का मामला सामने आने पर चिंता
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने एक बुजुर्ग महिला का उदाहरण दिया, जिन्हें वह व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। उन्होंने बताया कि दुर्भाग्यपूर्ण रूप से साइबर ठगों ने उनकी पूरी रिटायरमेंट सेविंग्स हड़प लीं। इस घटना पर अदालत ने गहरी नाराजगी जताई।
एक वकील ने भी कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर पहले से स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है, तब भी लगातार ऐसे मामले सामने आना बेहद चिंताजनक है। इस पर सीजेआई ने कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि शिक्षित लोग भी इस तरह के धोखाधड़ी जाल में आसानी से फंस जा रहे हैं।
54 हजार करोड़ की ठगी पर सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस मुद्दे पर सख्त रुख दिखा चुका है। 9 फरवरी को अदालत ने डिजिटल फ्रॉड के जरिए 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को “संगठित लूट और डकैती” करार दिया था।
इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), बैंकों, दूरसंचार विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि बैंकों को संदिग्ध लेनदेन की पहचान कर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर खातों पर अस्थायी रोक लगानी चाहिए।
CBI जांच और मुआवजा व्यवस्था पर निर्देश
शीर्ष अदालत ने सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की पहचान कर देशव्यापी जांच करने के निर्देश दिए थे। साथ ही गुजरात और दिल्ली सरकारों को भी इन मामलों में जांच की अनुमति देने को कहा गया था।
इसके अलावा, अदालत ने RBI, दूरसंचार विभाग और अन्य संस्थाओं को मिलकर पीड़ितों के लिए मुआवजा प्रणाली तैयार करने पर भी जोर दिया था।
अगली सुनवाई 12 मई को
अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि RBI ने बैंकों के लिए एक प्रारंभिक SOP तैयार कर लिया है, जिसमें संदिग्ध ट्रांजेक्शन रोकने और खातों पर डेबिट होल्ड लगाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इस मामले की अगली सुनवाई अब 12 मई को होगी।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक नया तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को फोन या वीडियो कॉल करते हैं।
वे पीड़ित को यह कहकर डराते हैं कि उसके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है या तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है। इसके बाद पीड़ित को लंबे समय तक कॉल पर बनाए रखकर मानसिक दबाव में लाया जाता है और अंततः उससे बैंक ट्रांसफर या डिजिटल भुगतान के जरिए पैसे ठग लिए जाते हैं।
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