रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन पर बोले पीएम मोदी- आत्मकथाएं पढ़ें, दूसरों के संघर्ष से सीखें

HIGHLIGHTS
- रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का हुआ विमोचन
- पीएम मोदी ने कोविंद के संघर्षों की सराहना की
- युवाओं को सोशल मीडिया के दौर में सतर्क रहने की सलाह
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरों के संघर्षों से सीख लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि रील्स के दौर में युवाओं को यह याद रखना चाहिए कि शॉर्टकट इंसान को छोटा कर देता है।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ के विमोचन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कोविंद के जीवन और उनके संघर्षों की सराहना की।
युवाओं को पीएम मोदी की सलाह
प्रधानमंत्री ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील करते हुए कहा कि ऐसी किताबों के जरिए किसी खास दौर को उस व्यक्ति के जीवन के माध्यम से समझने का मौका मिलता है, जिसने उस समय को खुद जिया है।
मोदी ने कहा कि आज रील्स का दौर है और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स किसी न किसी तरह लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लेकिन ऐसे समय में भी यह याद रखना चाहिए कि रेलवे स्टेशनों पर लिखा होता है कि शॉर्टकट आपको छोटा कर देगा।
पीएम मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब सरकार और भाजपा की ओर से सोशल मीडिया पर जेन जी के साथ जुड़ने के प्रयास बढ़ाए गए हैं। हाल ही में पीएम मोदी ने भी युवाओं को संबोधित करते हुए कई रील्स पोस्ट की हैं।
संघर्ष से सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर
पीएम मोदी ने कहा कि रामनाथ कोविंद का जीवन बताता है कि दृढ़ संकल्प के जरिए व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद भी कोविंद की सार्वजनिक सक्रियता का उल्लेख किया।
मोदी ने कहा कि पद से हटने के बाद कोविंद घर पर नहीं बैठे, बल्कि वन नेशन, वन इलेक्शन पहल पर काम कर रहे हैं। यह भारतीय लोकतंत्र में एक नया अध्याय खोल सकता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पूर्व राष्ट्रपति के प्रयास भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में उनके निरंतर योगदान का हिस्सा हैं।
भारतीय लोकतंत्र की धरोहर बनेगी आत्मकथा
प्रधानमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र के लिए एक धरोहर साबित होगी और नई पीढ़ी को इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि किताब का शीर्षक पूरी तरह उपयुक्त है, क्योंकि कोविंद का जीवन और उनके संघर्ष भले ही व्यक्तिगत रहे हों, लेकिन उन संघर्षों की जीत भारतीय लोकतंत्र की जीत है।
मोदी ने बचपन की उस घटना को भी याद किया, जब घर का सामान बचाने की कोशिश के दौरान आग लगने से कोविंद ने अपनी मां को खो दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घटना उन्हें तोड़ सकती थी, लेकिन इसके बजाय उन्होंने खुद को और मजबूत बनाया। उनके पिता ने भी उन्हें संस्कार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कोविंद ने साझा कीं बचपन की यादें और संघर्ष
कार्यक्रम में रामनाथ कोविंद ने अपने बचपन की कठिन परिस्थितियों और अपने परिवेश से मिले मूल्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि वह उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के एक गांव से आते हैं और उन्होंने ग्रामीणों से आपसी करुणा और प्रेम सीखा।
कोविंद ने अपने बचपन की याद साझा करते हुए बताया कि उनके घर की छत से बारिश का पानी टपकता था और पूरा परिवार बारिश रुकने का इंतजार करता था।
उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि सरकारी आवास योजनाओं के जरिए करोड़ों गरीब परिवारों को सिर पर छत मिली है और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिला है। भाजपा से अपने जुड़ाव पर कोविंद ने कहा कि वह इस पार्टी से इसलिए जुड़े क्योंकि उनके अनुसार यह पार्टी वंशवाद और समुदाय से ऊपर राष्ट्र को प्राथमिकता देती है।
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मौजूद रहे। उन्होंने रामनाथ कोविंद को दृढ़ संकल्प का जीवंत उदाहरण बताया और भारत के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और कई केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित रहे।
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