विदेशी ताकतें धर्मांतरण और नशे से कर रहीं प्रहार, एकजुटता में ही सनातन की सुरक्षा: सीएम योगी

झज्जर के कबलाना गांव में रविवार को सिद्ध बाबा पालनाथ जी महाराज धाम में आयोजित भव्य मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा एवं विशाल भंडारे में पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंच से तीखे शब्दों में विदेशी शक्तियों की नीयत पर सवाल उठाए।
मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने हवन में आहूतियां अर्पित कीं, धूने की पूजा की और संतों का आशीर्वाद लेने के बाद सभा को संबोधित किया। योगी ने कहा कि भारत इस समय दो खतरनाक चुनौतियों से जूझ रहा है धर्मांतरण और नशे का फैलता जाल।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बाहरी ताकतें समाज की एकता को तोड़ने के लिए धर्मांतरण को हथियार बना रही हैं और नशे के जरिए युवाओं के भविष्य पर वार कर रही हैं। उनके अनुसार, “यह हमला बंदूक का नहीं, अंदर से खोखला करने की कोशिश है।”
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत को मजबूत बनाए रखने के लिए जाति, तुष्टिकरण, भाषा और क्षेत्रीय राजनीति की संकीर्णताओं से ऊपर उठना होगा। उन्होंने मंच से स्पष्ट कहा, “राष्ट्र की रक्षा का पहला मार्ग सनातन धर्म की रक्षा है। आज चूके, तो आने वाली पीढ़ियां हमें क्षमा नहीं करेंगी।”
उन्होंने लोगों से हर घर में धर्म ध्वज लगाने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि विदेशी ताकतें हमेशा भारत की आंतरिक कमजोरियों का फायदा उठाती आई हैं और आज भी वही प्रयास दोहराए जा रहे हैं।
हरियाणा की नायब सैनी सरकार की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने विकास, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द्र को नई गति दी है।
कार्यक्रम में महंत योगी बाबा बालकनाथ की अध्यक्षता रही और सांसद धर्मबीर सिंह, विधायक सुनील सांगवान व उमेद पातूवास सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
अंत में योगी ने कबलाना और झज्जर की समृद्धि की कामना की और कहा, “एकजुट रहेंगे तो देश मजबूत रहेगा… जय श्रीराम।”
कबलाना में जुटी भीड़ ने दिलाई प्रयागराज महाकुंभ की याद
सभा को आगे संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने नाथ परंपरा, शिव उपासना और सनातन संस्कृति की वीरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की जीत हमेशा धर्म की मजबूती से ही सुनिश्चित हुई है।
योगी ने बताया कि नाथ संप्रदाय ने भगवान आदिनाथ शिव के ज्ञान को 12 उपबंधों के माध्यम से पूरे देश में पहुंचाकर एकता की लौ जलाई। उन्होंने शिव परिवार की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा को भारत की सांस्कृतिक अखंडता का प्रतीक बताया और कहा कि “कैलाश के शिव हों या रामेश्वरम के भारत की आत्मा शिव में ही एक होती है।”
अयोध्या का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम जन्मभूमि पर फहराया गया विशाल भगवा ध्वज केवल प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, सनातन संस्कृति अपने आदर्शों पर अडिग रहती है।
कबलाना में उमड़ी भीड़ को उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ की याद दिलाने वाला बताया और कहा कि यही ऊर्जा राष्ट्र को जोड़ने का आधार बनती है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.