‘जो उचित समझो, वो करो’ बयान पर जनरल नरवणे की सफाई, कहा- गलत मतलब निकाला गया

नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी अप्रकाशित पुस्तक को लेकर चल रहे विवाद पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उस कथित बयान “जो उचित समझो, वो करो” के संदर्भ में सफाई देते हुए कहा कि इसका गलत अर्थ निकाला गया है और इसका उद्देश्य सेना को पूरी तरह ऑपरेशनल स्वतंत्रता देना था, न कि किसी तरह की राजनीतिक टिप्पणी करना।
एक रिपोर्ट के अनुसार, जनरल नरवणे ने कहा कि उस समय सरकार ने सेना के नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताया था और जमीनी हालात को देखते हुए निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता दी गई थी। उनके अनुसार, यह भरोसा इस बात का संकेत था कि सेना हर परिस्थिति में जिम्मेदारी के साथ सही निर्णय लेने में सक्षम है।
सेना को राजनीति से दूर रखने पर जोर
पूर्व सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना एक पूरी तरह से गैर-राजनीतिक संस्था है और इसे किसी भी राजनीतिक बहस में नहीं खींचा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और कुछ अन्य देशों की व्यवस्था में बड़ा अंतर है, जहां भारत में सेना नागरिक सरकार के नियंत्रण में काम करती है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
यह विवाद उस समय सामने आया जब संसद के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ का उल्लेख किया। किताब प्रकाशित नहीं होने के कारण सदन में इसके हवाले पर आपत्ति जताई गई थी।
बाद में राहुल गांधी ने संसद परिसर में किताब का हवाला देते हुए दावा किया कि चीन की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी के बावजूद सरकार की प्रतिक्रिया स्पष्ट नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से “जो उचित समझो, वो करो” जैसा संदेश दिया गया था।
यह घटना 31 अगस्त 2020 के उस समय से जुड़ी बताई जाती है, जब पूर्वी लद्दाख में चीन की गतिविधियां बढ़ गई थीं।
किताब और सीमा मुद्दे पर स्पष्टीकरण
जनरल नरवणे ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी किताब किसी गोपनीय जानकारी पर आधारित नहीं है, बल्कि यह उनके व्यक्तिगत अनुभवों और विचारों का संकलन है। सीमा विवाद पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय भारत की स्थिति मजबूत थी और कई क्षेत्रों में चीन को पीछे हटना पड़ा था।
उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि भारत ने किसी क्षेत्र को खोया है। उनके अनुसार, उस समय सरकार और सेना के बीच पूरी समन्वय व्यवस्था थी और सभी निर्णय संयुक्त रूप से लिए गए थे।
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