गोरखपुर: मां की डांट से नाराज किशोर घर छोड़ भागा, 635 किमी दूर मिली लोकेशन

गोरखपुर एम्स थाना क्षेत्र में एक हाईस्कूल के छात्र ने मां की डांट से नाराज होकर घर छोड़ दिया। जानकारी के अनुसार, किशोर ने जाते समय घर की अलमारी में रखे 10-10 ग्राम के दो सोने के बिस्किट भी अपने साथ ले लिए। परिजनों ने एम्स थाने में बच्चे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पुलिस ने तुरंत खोजबीन शुरू कर दी, और किशोर की लोकेशन सिलीगुड़ी में मिली है। झरना टोला न्यू टीचर कॉलोनी निवासी मां ने बताया कि उनके पति दुबई में एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। उनके दो बेटे हैं, जिनमें छोटा बेटा 16 वर्षीय है और वह इंग्लिश मीडियम स्कूल में हाईस्कूल का छात्र है।
मां के अनुसार, बेटा अक्सर शरारती रहता है और इसी कारण उसे डांट पड़ती रहती है। 21 दिसंबर को बेटा देर से घर लौटा। जब मां ने कारण पूछा, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। नाराज होकर मां ने उसे डांटा, और शाम करीब पांच बजे किशोर घर से चला गया। परिजनों ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और रिश्तेदारों के घर उसकी तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
एम्स थाना प्रभारी संजय मिश्रा ने बताया कि पुलिस टीम किशोर को जल्द ही सुरक्षित ढूंढकर परिजनों के पास लौटाने की कार्रवाई में लगी हुई है।
बच्चों की भावनाएं और आधुनिक जीवनशैली
विशेषज्ञों के अनुसार आज के किशोरों का मन पहले से अधिक संवेदनशील और अस्थिर हो गया है। छोटी-छोटी बातों पर डांट या टोका-टाकी उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित कर रही है। सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया का प्रभाव बच्चों की सोच और व्यवहार पर गहरा पड़ रहा है। ‘परफेक्ट लाइफ’ और प्रतिस्पर्धा की तुलना उन्हें मानसिक दबाव में डालती है।
पिछले कुछ महीनों में गोरखपुर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां किशोर मामूली विवाद के बाद घर छोड़ गए। पुलिस का कहना है कि अभिभावक बच्चों के व्यवहार में बदलावों को गंभीरता से लें और संवाद बनाए रखें।
पूर्व मामले
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मां की डांट से डरकर भागा किशोर: जून 2025 में खजनी थाना क्षेत्र के 12 वर्षीय किशोर मां की डांट से नाराज होकर घर से गायब हुआ। पुलिस ने 12 घंटे के भीतर उसे सुरक्षित ढूंढ लिया।
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मां की डांट से आहत किशोरी ने जान दी: जुलाई 2024 में गीडा थाना क्षेत्र की एक किशोरी ने मां की डांट से आहत होकर फंदे से अपनी जान दे दी।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. मनीष कुमार पांडेय (समाजशास्त्र विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय) के अनुसार, शिक्षा और जीवनशैली के बढ़ते दबाव, पारिवारिक तनाव और सोशल मीडिया ने बच्चों की भावनाओं को अस्थिर बना दिया है। संवाद और समय की कमी उन्हें अकेलापन और चिड़चिड़ापन दे रही है।
डॉ. आकृति पांडेय (मनोवैज्ञानिक) बताती हैं कि पहले संयुक्त परिवार और सामाजिक जुड़ाव बच्चों को धैर्य और संतुलन सिखाता था। आज के बच्चे हर चीज तुरंत पाने के आदी हैं और डांट-टोक पर भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं। मोबाइल और सोशल मीडिया की अधिकता वास्तविक दुनिया से दूरी बढ़ा रही है, जिससे छोटी बातों पर आवेगपूर्ण कदम बढ़ रहे हैं।
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