हिमाचल सरकार ने 16वें वित्त आयोग और आरडीजी समाप्ति के प्रभावों पर दी विस्तृत प्रस्तुति

शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित एक विशेष प्रस्तुति में राज्य की वित्तीय स्थिति और राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति के प्रभावों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, मंत्रीगण, विधायकगण, प्रशासनिक अधिकारी और मीडिया सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आगामी बजट पर दीर्घकालिक असर डालेगी। उन्होंने आरडीजी की समाप्ति को राज्य की जनता के अधिकारों के हनन से जोड़ते हुए कहा कि यदि इसे समाप्त किया गया, तो राज्य के लिए वित्तीय चुनौतियां गंभीर होंगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के सांसदों और विधायकों के साथ दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से इस मामले पर चर्चा करने को तैयार हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश पर आरडीजी का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है क्योंकि राज्य के बजट का लगभग 12.7 प्रतिशत हिस्सा इसी अनुदान पर निर्भर है। उन्होंने जीएसटी लागू होने के बाद कर संग्रह में कमी और राज्य की वित्तीय सीमाओं का भी जिक्र किया।
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार आत्मनिर्भर हिमाचल बनाने के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है और संसाधनों के निर्माण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की बकाया राशि, शानन पावर प्रोजेक्ट और बिजली परियोजनाओं पर रॉयल्टी सुनिश्चित करने के मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के हितों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य के संसाधनों में वृद्धि के साथ कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वन क्षेत्र और भूस्खलन जैसी आपदाओं के लिए धन आवंटन की मांग भी वित्त आयोग द्वारा स्वीकार की गई है।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि वित्त विभाग ने 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के प्रभाव पर विस्तृत सुझाव प्रस्तुत किए हैं और अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल द्वारा लिया जाएगा।
फाइनेंस विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत आरडीजी का प्रावधान किया गया था और यह 15वें वित्त आयोग तक राज्य को मिलता रहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य की अपनी आय लगभग 18,000 करोड़ रुपये है, जबकि प्रतिबद्ध व्यय लगभग 48,000 करोड़ रुपये है। आरडीजी के समाप्त होने से बजट अंतर गंभीर हो गया है और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष वित्तीय चिंता उत्पन्न हुई है।
मुख्यमंत्री ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि ये वित्तीय सिफारिशें केवल वर्तमान सरकार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य की सरकारों और राज्य की जनता पर भी प्रभाव डालेंगी। उन्होंने सभी से मिलकर प्रदेश हितों की रक्षा और वित्तीय स्थिरता के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।
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