हिमाचल हाईकोर्ट का निर्देश: पंचायत चुनाव 30 अप्रैल से पहले कराए जाएं

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार सुबह पंचायत चुनाव समय पर कराने के संबंध में अंतिम फैसला सुनाया। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को आदेश दिया कि चुनाव 30 अप्रैल से पहले संपन्न कराए जाएं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पंचायती राज विभाग, चुनाव आयोग और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे आपस में बैठक कर चुनाव की रणनीति तय करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक संस्थाओं को बनाए रखने के लिए चुनाव को अनिश्चितकाल तक स्थगित नहीं किया जा सकता।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने आदेश में कहा कि चुनाव प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू होगी और 30 अप्रैल तक सभी पंचायतों में मतदान संपन्न कर लिया जाएगा।
सरकार ने पेश की थी चुनौतियां
7 जनवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा था कि चुनाव टालने के आरोप निराधार हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नई पंचायतें, ग्राम समितियां और जिला परिषदों के गठन की प्रक्रिया चल रही है।
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद भी चुनाव प्रक्रिया में कम से कम 90 दिन लगेंगे। इसके अलावा फरवरी और मार्च में परीक्षाओं के कारण कर्मचारियों की अनुपलब्धता, मई में जनगणना की ड्यूटी और जुलाई-अगस्त में वर्षा के मौसम को लेकर चुनाव कराना कठिन होगा।
याचिकाकर्ता ने चुनौती दी
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि पंचायत चुनाव जानबूझकर समय पर नहीं करवाए जा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार के पास नई परिसीमाओं के गठन के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन इसे विलंबित किया गया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वर्तमान चुनाव पुरानी जनगणना के आधार पर कराए जाएं और नई परिसीमाओं का गठन भविष्य के लिए किया जाए।
अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों को संज्ञान में लेते हुए राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए कि पंचायत चुनाव समय पर संपन्न कराए जाएं।
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