भारत ने दिखाई कूटनीतिक ताकत: अमेरिका और रूस के जहाज मंगलूरू पोर्ट पहुंचे

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के चलते दुनियाभर में कच्चे तेल और गैस की किल्लत बढ़ गई है, लेकिन भारत ने अपनी कूटनीतिक और रणनीतिक तैयारी से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की है।
रविवार को अमेरिका का एलपीजी कार्गो जहाज पिक्सिस पायनियर 16,714 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस लेकर मंगलूरू बंदरगाह पहुंचा। इससे एक दिन पहले ही रूस का तेल टैंकर एक्वा टाइटन लगभग 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर मंगलूरू पहुंच चुका था।
अमेरिकी एलपीजी और रूसी क्रूड तेल की आपूर्ति
अमेरिकी जहाज पिक्सिस पायनियर ने 14 फरवरी को टेक्सास के पोर्ट ऑफ नेदरलैंड से भारत की ओर यात्रा शुरू की थी। इसमें लोड की गई एलपीजी को एजिस लॉजिस्टिक्स के माध्यम से उतारा गया।
रूसी टैंकर एक्वा टाइटन मूल रूप से चीन के लिए रवाना हुआ था, लेकिन बाद में इसे भारत की ओर मोड़ दिया गया। इस टैंकर में 1 लाख टन से अधिक कच्चा तेल मौजूद था।
होर्मुज की स्थिति और वैश्विक संकट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास दुनिया के लगभग 700 जहाज फंसे हुए हैं। इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा है और मध्य पूर्व एशिया से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई होने वाला लगभग 20% कच्चा तेल नहीं पहुंच पा रहा। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है और एलपीजी संकट भी गहराया है।
मंगलूरू पोर्ट: भारत की ऊर्जा सुरक्षा का अहम केंद्र
मंगलूरू पोर्ट में भारत की सबसे बड़ी भूमिगत एलपीजी स्टोरेज सुविधा है। यह समुद्र तल से 225 मीटर नीचे स्थित है और इसकी क्षमता 80,000 मीट्रिक टन है। विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और रूस से लगातार आपूर्ति मिलने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और घरेलू एलपीजी स्टॉक बनाए रखना आसान होगा।
इस पूरी स्थिति से स्पष्ट है कि युद्ध और वैश्विक संकट के बीच भी भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तैयारी के साथ काम कर रहा है।
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