संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी, 'फॉर्म 47 सरकार' पर भी कसा तंज

HIGHLIGHTS
- UN महासभा की तीसरी समिति में अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर चर्चा।
- भारत ने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के हालात का किया जिक्र।
- फरवरी 2024 के चुनावों को लेकर पाकिस्तान की सरकार पर तंज।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश करने के बजाय अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दे। भारत ने पाकिस्तान की राजनीति में सेना के प्रभाव, मानवाधिकारों की स्थिति और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए।
भारत ने कहा कि पाकिस्तान में सेना का प्रभाव इतना अधिक है कि सरकार उसके फैसलों के खिलाफ जाने की स्थिति में नहीं है। साथ ही, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की वकालत करने वाले पाकिस्तान से अपने देश में लोगों के साथ होने वाले व्यवहार पर भी ध्यान देने को कहा।
पाकिस्तान की सरकार पर भारत ने साधा निशाना
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में शनिवार को अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघू पुरी ने पाकिस्तान की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा है और इसके जरिए अपने देश की समस्याओं से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान हटाना चाहता है। पुरी ने पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था, कई क्षेत्रों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक के हालात पर ध्यान देने की जरूरत है।
'पाकिस्तान में सेना ही असली ताकत'
भारत ने पाकिस्तान की राजनीति में सेना की भूमिका पर भी सवाल उठाए। रघू पुरी ने कहा कि वहां सेना के हितों को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है और सेना ही देश की वास्तविक ताकत है।
पाकिस्तानी प्रतिनिधि पर तंज कसते हुए पुरी ने कहा कि भारत उनकी परेशानी समझ सकता है, क्योंकि पाकिस्तान की सरकार के लिए सेना के निर्देशों की अनदेखी करना आसान नहीं है।
उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार के लिए 'फॉर्म 47 सरकार' शब्द का इस्तेमाल किया। यह शब्द फरवरी 2024 में हुए आम चुनावों के बाद कथित धांधली और चुनावी नतीजों में अनियमितताओं के आरोपों के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है।
क्या है 'फॉर्म 47 सरकार' का मामला?
पाकिस्तान में फॉर्म 47 एक आधिकारिक चुनावी दस्तावेज है, जिसमें निर्वाचन क्षेत्र के मतदान के समेकित नतीजे दर्ज किए जाते हैं।
फरवरी 2024 के आम चुनावों के बाद चुनावी नतीजों में कथित हेरफेर और अनियमितताओं को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद सरकार के आलोचक मौजूदा सरकार को 'फॉर्म 47 सरकार' कहने लगे। भारत ने इसी संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाए।
अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर भी पाकिस्तान को घेरा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करता है, लेकिन उसके अपने रिकॉर्ड पर भी सवाल उठते हैं।
रघू पुरी ने कहा कि पाकिस्तान में आजादी के बाद से अल्पसंख्यकों की आबादी में काफी गिरावट आई है। उन्होंने पाकिस्तान को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपने देश की स्थिति सुधारने और नागरिकों के हितों पर ध्यान देने की सलाह दी।
जम्मू-कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना रुख
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अक्सर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है और इस पर भारत के रुख की आलोचना करता है।
भारत ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत ने कहा कि अब केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली कराने का मुद्दा शेष है।
भारत ने अपनी विविधता और संवैधानिक अधिकारों का किया उल्लेख
अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर चर्चा के दौरान भारत ने कहा कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनके अधिकारों को बढ़ावा देना प्रत्येक देश की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
रघू पुरी ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे विविध समाजों में शामिल है, जहां विभिन्न धर्मों, भाषाओं और समुदायों के लोग साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि विविधता भारत की सभ्यता की पहचान रही है और देश को इस पर गर्व है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है। अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और संवैधानिक पदों, सरकारी संस्थानों, सेना, कानून-व्यवस्था, फिल्म जगत तथा कारोबार सहित विभिन्न क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाई है।
पुरी ने कहा कि पाकिस्तान में इस तरह के उदाहरण ढूंढना उनके लिए मुश्किल है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.