भारत को मिलेगा समुद्र का अदृश्य योद्धा, रक्षा मंत्री की मौजूदगी में जर्मनी से डील संभव

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार से जर्मनी की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई गति देना और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण “डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप” को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है, जिसके तहत भारत और जर्मनी भविष्य में रक्षा उपकरणों और हथियारों के संयुक्त विकास तथा उत्पादन की दिशा में मिलकर काम कर सकेंगे।
बर्लिन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस और अन्य शीर्ष नेतृत्व के साथ विस्तृत वार्ता करेंगे। इन बैठकों में रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने, सैन्य स्तर पर आपसी समन्वय मजबूत करने और आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान रहेगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस दौरान रक्षा औद्योगिक सहयोग से जुड़ा रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए प्रशिक्षण सहयोग से संबंधित एक समझौता भी हो सकता है।
यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि करीब सात वर्षों के अंतराल के बाद कोई भारतीय रक्षा मंत्री जर्मनी का दौरा कर रहा है। इससे पहले वर्ष 2019 में तत्कालीन रक्षा मंत्री ने जर्मनी की यात्रा की थी। इस बार राजनाथ सिंह जर्मन रक्षा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे, जिसका उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत में संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान भारत-जर्मनी के बीच प्रोजेक्ट 75 इंडिया के तहत छह आधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों से जुड़े समझौते पर भी चर्चा आगे बढ़ सकती है। यह प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इसके तहत जर्मन कंपनी थिसनकुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के बीच पहले ही एक समझौता हो चुका है, और अब तकनीकी हस्तांतरण व संयुक्त निर्माण पर बातचीत तेज होने की उम्मीद है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच भारत अपनी नौसैनिक क्षमता को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस ये पनडुब्बियां बिना सतह पर आए लंबे समय तक पानी के भीतर संचालन करने में सक्षम होती हैं, जिससे इनकी रणनीतिक उपयोगिता और बढ़ जाती है।
कुल मिलाकर, यह यात्रा भारत और जर्मनी के बीच रक्षा साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने और भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिए एक मजबूत औद्योगिक ढांचा तैयार करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
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