फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों के बीच भारतीय दूतावास की एडवाइजरी, नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह

HIGHLIGHTS
- पेरिस स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को सुरक्षा एडवाइजरी जारी की।
- फ्रांस के पेरिस, लिली, लियोन और नीस में कर्फ्यू लगाया गया।
- सप्ताहांत की हिंसा में 2,400 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की मीडिया रिपोर्टें हैं।
फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और कई शहरों में कर्फ्यू लगाए जाने के बीच भारत ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पेरिस स्थित भारतीय दूतावास ने फ्रांस में रह रहे भारतीयों के साथ-साथ वहां जाने की योजना बना रहे लोगों से भी सावधानी बरतने को कहा है। दूतावास ने प्रदर्शन स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी
भारतीय दूतावास ने बुधवार को जारी सलाह में कहा कि फ्रांस के कुछ इलाकों में कर्फ्यू लागू होने के मद्देनजर भारतीय नागरिक सतर्क रहें। दूतावास ने लोगों को स्थानीय समाचारों और फ्रांस सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से स्थिति पर नजर बनाए रखने की सलाह भी दी है।
दूतावास ने नागरिकों को क्या सलाह दी?
प्रदर्शन स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। फ्रांस में हालात से जुड़ी जानकारी के लिए सरकार की आधिकारिक वेबसाइट gouvernement.fr पर जारी अपडेट देखते रहें।
पेरिस क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन से संबंधित ताजा जानकारी के लिए आरएटीपी की वेबसाइट पर जाएं। किसी आपात स्थिति में पेरिस स्थित भारतीय दूतावास या मार्सिले स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क करें।
फ्रांस में क्यों हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन?
फ्रांस में सितंबर के अंतिम दिनों में छात्रों ने स्कूलों की खराब स्थिति, संसाधनों की कमी और कक्षाओं में अधिक भीड़ होने के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए थे। समय के साथ यह आंदोलन व्यापक हो गया। महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी चिंताओं को लेकर सरकार के खिलाफ भी विरोध तेज हो गया।
प्रदर्शनों के दौरान लूटपाट और आगजनी की घटनाएं हुईं। इसके अलावा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं।
किन शहरों में लगाया गया कर्फ्यू?
17 अक्टूबर को प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने के बाद अधिकारियों ने पेरिस के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लागू किया। लिली, लियोन और नीस में भी स्थानीय स्तर पर कर्फ्यू लगाया गया, जबकि मार्सिले में सभाओं और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाए गए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सप्ताहांत में हुई हिंसा के दौरान 2,400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, इन घटनाओं में करीब 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए।
फ्रांस के प्रमुख छात्र संघों और येलो वेस्ट आंदोलन ने शनिवार को रैलियां आयोजित करने का आह्वान किया है। येलो वेस्ट आंदोलन ने 2018 और 2019 में ईंधन की कीमतों के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे, जिनका असर पूरे देश में दिखाई दिया था।
इसके अलावा, ट्रेड यूनियनों ने महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती के विरोध में 5 नवंबर को हड़ताल करने का ऐलान किया है।
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