22 दोषियों को मौत की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार की कोर्ट से 100 मुकदमे रिकॉल

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर की फास्ट ट्रैक कोर्ट से करीब 100 मुकदमे रिकॉल किए गए।
- रिकॉल किए गए मुकदमों को दूसरी अदालतों में स्थानांतरित किया गया है।
- इनमें हत्या समेत गंभीर आपराधिक धाराओं और कुछ चर्चित मामलों के मुकदमे भी शामिल बताए जा रहे हैं।
मुजफ्फरनगर। फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर के न्यायालय से करीब 100 मुकदमों को रिकॉल कर दूसरी अदालतों में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी सामने आई है। जिला जज ने इन मुकदमों को वापस लेकर अन्य न्यायालयों में भेजा है। इनमें हत्या समेत गंभीर आपराधिक धाराओं वाले और कुछ चर्चित मामले भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, मुकदमों को रिकॉल किए जाने के पीछे का आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
जज रवि कुमार दिवाकर पिछले करीब पांच महीने में दिए गए कड़े फैसलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनकी अदालत ने नौ अलग-अलग मामलों में कुल 22 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। गंभीर आपराधिक मामलों में तेजी से हुई सुनवाई और इन फैसलों के कारण उनका न्यायालय लगातार सुर्खियों में रहा।
करीब 100 मुकदमे दूसरी अदालतों में भेजे गए
जानकारी के मुताबिक, जिला जज ने फास्ट ट्रैक कोर्ट से करीब 100 मुकदमों को रिकॉल किया है। इसके बाद इन मामलों को दूसरी अदालतों में स्थानांतरित कर दिया गया। रिकॉल किए गए मुकदमों में हत्या समेत गंभीर अपराधों से जुड़े मामले शामिल बताए जा रहे हैं।
बड़ी संख्या में मुकदमों को एक अदालत से वापस लेकर दूसरी अदालतों में भेजे जाने के बाद अधिवक्ताओं और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच इस कार्रवाई को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
चर्चित हत्या के मुकदमे भी शामिल बताए जा रहे
रिकॉल किए गए मामलों में कुछ चर्चित हत्या के मुकदमे भी शामिल बताए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य, अन्य सबूत और अभियोजन एवं बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ती है।
अदालत बदलने के बाद इन मुकदमों की सुनवाई संबंधित नए न्यायालय में होगी। जिन मामलों में सुनवाई किसी महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है, उनमें आगे की प्रक्रिया मामले की स्थिति और संबंधित न्यायालय के आदेश के अनुसार तय होगी।
5 महीने में 9 मामलों में 22 दोषियों को फांसी
रवि कुमार दिवाकर की अदालत पिछले करीब पांच महीने में नौ मामलों में 22 दोषियों को मृत्युदंड सुनाने के कारण चर्चा में रही। हत्या और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में आए इन फैसलों को न्यायिक हलकों में विशेष रूप से देखा गया।
अब उसी न्यायालय से करीब 100 मुकदमों के रिकॉल और दूसरी अदालतों में स्थानांतरण की जानकारी सामने आने के बाद इस कार्रवाई ने एक बार फिर न्यायिक और अधिवक्ता हलकों का ध्यान खींचा है।
आधिकारिक आदेश के बाद स्पष्ट होगा कारण
फिलहाल मुकदमों को रिकॉल करने के पीछे जिला जज की ओर से दर्ज किए गए प्रशासनिक या न्यायिक कारण की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए कार्रवाई के कारण को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
आधिकारिक आदेश और स्थानांतरित किए गए मुकदमों की पूरी सूची सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन मामलों को किस आधार पर रिकॉल किया गया और उन्हें किन न्यायालयों में भेजा गया है।
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