अस्पतालों की तर्ज पर काम करे न्यायपालिका: चीफ जस्टिस सूर्यकांत

मंडी: भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका से जुड़े लोगों से अपील की है कि वे न्याय प्रणाली में वैसा ही समर्पित और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएं, जैसा अस्पताल में बीमार मरीज का इलाज किया जाता है। रविवार को मंडी के स्कृति सदन में मौलिक अधिकार और कर्तव्य विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि न्यायालय में आने वाले लोग भी बीमार व्यक्ति की तरह ही मदद और मार्गदर्शन के हकदार होते हैं।
जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जिस तरह अस्पताल में मरीज को ठीक करने की पूरी कोशिश की जाती है, न्यायिक प्रणाली में भी लोगों के लिए वही उम्मीद और उपचार सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने न्यायिक प्रणाली से जुड़े सभी कर्मियों से कहा कि वे न्याय को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अस्पताल जैसी सेवाओं का उदाहरण अपनाएं, ताकि न्याय व्यवस्था की छवि मजबूत और विश्वसनीय बनी रहे।
मौलिक अधिकारों के दुरुपयोग पर चेतावनी
संगोष्ठी में उन्होंने मौलिक अधिकारों के सही उपयोग पर भी जोर दिया। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मौलिक अधिकारों का दुरुपयोग आज बड़ी समस्या बन चुका है। कई लोग अपने स्वयं को महत्वपूर्ण मानकर इन अधिकारों का गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया, टीवी और पॉडकास्ट पर महिलाओं के बारे में अपमानजनक या असंगत टिप्पणियों को मौलिक अधिकार की श्रेणी में लाने की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह मौलिक अधिकारों की वास्तविक भावना के विपरीत है।
छोटी काशी में नया न्याय मंदिर
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मंडी को छोटी काशी कहा जाता है और यहां के मंदिरों के प्रति लोगों की अटूट आस्था है। लोग अपने दुख और परेशानी के समय इन मंदिरों में प्रार्थना करने आते हैं। इसी परंपरा में इस बार छोटी काशी में एक नया न्याय मंदिर स्थापित किया गया है। उन्होंने प्रदेश सरकार और हाईकोर्ट को इस प्रयास के लिए बधाई दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया सहित अन्य न्यायाधीश और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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