काशी ने रचा इतिहास: एक घंटे में 2.45 लाख पौधे लगाकर बनाया विश्व रिकॉर्ड

वाराणसी। काशी शहर ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम कर दिया है। नगर निगम द्वारा सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में विकसित किए जा रहे आधुनिक 'शहरी वन' में कुल 2,45,103 पौधे रोपे गए, जिससे 2018 में चीन द्वारा लगाए गए 1,53,981 पौधों का रिकॉर्ड टूट गया।
इस ऐतिहासिक परियोजना का शुभारंभ रविवार सुबह 9:11 बजे हुआ और 10:11 बजे इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस मौके पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम भी मौजूद रही।
जनभागीदारी और सहयोग
इस पौधरोपण अभियान में नगर निगम के 5,000 कर्मचारी, स्थानीय स्कूल और कॉलेज के छात्र, एनडीआरएफ, 39 जीटीसी, यूपी पुलिस, सिविल डिफेंस, एनसीसी व एनएसएस के विद्यार्थी और काशी की जनता ने सहयोग किया। अनुमान है कि लगभग 15,000 लोग इस प्रयास में शामिल रहे। सभी पौधों की सुरक्षा तीन वर्षों तक खंडवा की राज नर्सरी करेगी।
गंगा घाटों के नाम पर 60 सेक्टर
शहरी वन को 60 सेक्टरों में बांटा गया है, प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रमुख गंगा घाटों जैसे दशाश्वमेध, ललिता, केदार, चौशट्टी और शीतला घाटों पर रखा गया है। हर सेक्टर में लगभग 5,000 पौधे लगाए गए हैं, जिससे गंगा तट पर एक हरा-भरा मिनी काशी का स्वरूप बन रहा है।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
इस वन परियोजना में फल और औषधि उत्पादों जैसे आम, अमरूद, पपीता, अश्वगंधा और शतावरी के साथ-साथ गुलाब, चमेली और पारिजात जैसे फूल भी उगाए जाएंगे। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ समझौते के तहत तीसरे वर्ष से नगर निगम को प्रति वर्ष लगभग 2 करोड़ रुपये की आय होगी, जो सातवें वर्ष तक 7 करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है।
स्मार्ट तकनीक और मियावाकी पद्धति
इस वन में 3 लाख पौधों को जीवित रखने के लिए मियावाकी तकनीक अपनाई गई है। इसके तहत 10,827 मीटर पाइपलाइन, 10 बोरवेल और 360 'रेन गन' सिस्टम लगाए गए हैं। नदी किनारे की मिट्टी बचाने के लिए शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों को रोपा गया है। चार किलोमीटर लंबा पाथवे पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बनाया गया है।
मियावाकी तकनीक क्या है?
जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित इस तकनीक में एक छोटे क्षेत्र में विभिन्न परतों वाले पेड़ और झाड़ियां लगाई जाती हैं। इससे जंगल जल्दी विकसित होता है, मिट्टी में नमी बनी रहती है और जैव विविधता बढ़ती है।
वाराणसी के पर्यावरण और संस्कृति में विश्व रिकॉर्ड
वाराणसी पहले से ही धार्मिक, सांस्कृतिक और कलात्मक क्षेत्र में कई विश्व रिकॉर्ड रखता है। देव दीपावली पर लाखों दीये जलाने, सामूहिक योग और संगीत कार्यक्रमों के माध्यम से काशी ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।
इस तरह, 'डोमरी शहरी वन' परियोजना ने न केवल पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है बल्कि काशी को एक बार फिर विश्व पटल पर चमकाया है।
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